पीलीभीत। अवैध खनन के मामले में अफसरों की 24 घंटे के अंदर खनन निकासी की अनुमति देने का मामला चर्चा में रहा। प्रशासन ने शर्तों के उल्लंघन में जेसीबी-पोकलैंड और ट्रैक्टर ट्रॉली तो सीज कर दीं, लेकिन माफियाओं और गुर्गों को बचाने के लिए इस मामले में खनन निकासी इलाके की न तो पैमाइश कराई, न ही नियमों के उल्लंघन पर दोषियों पर एफआईआर। कार्रवाई के बाद माफिया और उनके गुर्गे अफसरों के दफ्तर में पूरे दिन जमे रहे। अफसर उन्हें बचाने की तरकीब निकालते रहे।
बीसलुपर तहसील क्षेत्र के ढुकसी गांव में देवहा नदी के किनारे एक किसान के नाम से खेत में बाढ़ की जमा बालू निकालने को अनुमति मांगी गई थी। अफसरों ने 10 दिसंबर 2019 को दो मीटर गहराई में 8100 घनमीटर बालू निकालने की अनुमति 24 घंटे के अंदर लेखपाल से लेकर अफसर तक की जांच रिपोर्ट लगाकर दे दी थी। माफिया और उसके गुर्गों ने जेसीबी, पोकलैंड मशीनों से इस अनुमति की आढ़ में लाखों घनमीटर खनन कर लिया। जब यह मामला उछला तो बुधवार को एसडीएम और तहसीलदार ने बरसात में गांव जाकर खनन रुकवा दिया और मशीनें सीज कर दीं। मशीनों को कब्जे में लेकर थाने में खड़ा करा दिया, मगर खनन निकासी करने वाले माफियाओं को बचाने की जुगाड़ में अफसर लग गए। खनन निकासी में शर्तों का पालन हुआ या नहीं, यह जानने के लिए न तो खनन वाले इलाके की पैमाइश कराकर गड्ढे की गहराई नापी गई, न ही यह पता लगाया कि बालू की निकासी 8100 घनमीटर हुई है या उससे ज्यादा। अफसरों ने इसे शासनादेश की अनुमति से सही बताकर इस मामले में किसी पर एफआईआर नहीं कराई। मशीनें जब्त कर कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर मामला निपटा दिया। खनन निकासी करने वाले पूरे दिन मशीनें छुड़वाने की जुगाड़ में बृहस्पतिवार को एक बड़े अफसर के दफ्तर में जुटे रहे। अफसर ने भी अपनी अनुमति को ठीक बताकर खनन निकासी को नियमों का हवाला देते हुए उचित ठहराया।
बताया जाता है कि खनन निकासी कराने वाले ने एक विभाग के बड़े अफसर से दबाव डलवाया। उसके बाद एफआईआर रोक दी गई और सारे अफसर खनन को ठीक ठहराने के पक्ष में तर्क देने लगे।
सरकारी गजट में जो नियम दिए गए हैं। उसी हिसाब से खनन निकासी की अनुमति दी गई। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। - वैभव श्रीवास्तव, डीएम