सफाई के अभाव में बजबजाती नालियां, जहां-तहां पड़ा कूड़े का ढेर, पेयजल समस्या से जूझते वार्ड के लोग बस यही पहचान है नगर पालिका परिषद के वार्ड तीन की। ऊपर से दावा कि इस वार्ड में एक करोड़ रुपये के विकास के काम कराए गए। वार्ड के लोग इसके लिए चेयरमैन को दोषी मानते हैं। उनका कहना है कि तमाम समस्याओं की ओर चेयरमैन का ध्यान खींचा गया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।
नगरपालिका परिषद के वार्ड नंबर तीन में पटेलनगर, बारह पत्थर कॉलोनी, सरस्वती विहार, अंबेडकर नगर, दुगीपुर बड़गवां और मोहल्ला ग्यासपुर का काफी हिस्सा पड़ता है। एसआरएम कालेज के पीछे नहर तक सड़क नहीं बनाई गई है। रम्पुरा रोड पर स्ट्रीट लाइट के लगवाए गए 35 पोल शोपीस बने हुए हैं। पूरे वार्ड में स्ट्रीट लाइट के केवल 50 पोल लगे हुए हैं। 15 पोलों पर ही लाइट जल रही है। सरस्वती विहार से रपटुआ पुल तक बिजली के 20 पोल अभी तक नहीं लगवाए गए हैं। राजकीय महाविद्यालय के पास अघोषित रूप से डलावघर बना दिया गया है, जिसके कारण मोहल्ले वालों के साथ-साथ वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को खासी दिक्कत होती है। पूरे वार्ड में पिछले दो दशकों से पालिका द्वारा जलापूर्ति नहीं कराई जा रही है। सभी लोगों ने अपने घरों में पेयजल का बंदोबस्त अपने स्तर से कर रखा है, जबकि पालिका प्रशासन वार्ड वासियों से जलकर शुल्क नियमित रूप से वसूल कर रहा है। वार्डवासियों का कहना है कि उन लोगों ने कई बार इसका विरोध भी किया लेकिन चेयरमैन की तानाशही के चलते उनकी एक न चली। वार्ड के घरों का गंदा पानी और बारिश का पानी एक तालाब में गिरता है। बारिश के मौसम में जब तालाब लबालब हो जाता है, तभी तालाब का पानी पड़ोस के घरों में घुसने लगता है। वार्ड के 150 गरीबों के घरों में आज तक स्वच्छ शौचालय नहीं बनवाए गए हैं। यहां अभी भी संडास वाल शौचालय हैं, जबकि पालिका अपने अभिलेखों में संडास वाले शौचालय खत्म होने का दावा कर रही है। वार्ड की नालियों की नियमित रूप से सफाई न होने के कारण गंदगी पटी पड़ी है, जिससे संक्रामक रोग फैलने की आशंका है। नालियों में पानी का बहाव न के बराबर है। बारह पत्थर चौराहे पर स्थित अंबेडकर पार्क में चौकीदार न होने के कारण पार्क में दिनभर आवारा लोगों और जुआरियों का जमावड़ा बना रहता है। वार्ड में पिछले कई वर्षों से मच्छर मार दवा का छिड़काव नहीं हो रहा है। पूरे वार्ड में केवल दो हाईमास्ट लाइट हैं, जिनमें एक काफी समय से खराब है। कुल मिलाकर वार्ड की हालत गांव से भी बदतर है। वार्ड के लोग समय-समय पर चेयरमैन से मिलकर वार्ड की हालत सुधरवाने की गुहार करते रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज के समान गूंजकर रह गई है।
एक करोड़ से कराए विकास कार्य
मैंने अपने स्तर से विशेष प्रयास कर पूरे वार्ड में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य कराए हैं। बिजली के 50 पोल लगवाए। 25 सड़के बनवाई। दो नाले बनवाए। 50 नालियां बनवाई। 30 डिप डलवाए और इंडिया मार्का तीन हैंडपंप लगवाए। शुरू में चेयरमैन ने उनकी बातों को अनसुना करने का प्रयास किया था, लेकिन बाद में तेवर दिखाने पर चेयरमैन लाइन पर आ गए।
रीना देवी, सभासद
धन का किया बंदरबाट
वार्ड में विकास कराने के लिए पालिका कोष से निकाला गया एक करोड़ रुपये का बंदरबाट कर लिया गया। पांच वर्षों में कोई विकास कार्य नहीं हुआ। वार्ड के गरीबों को पालिका की ओर से कोई सुविधा नहीं मिली। पूरे वार्ड में वैसे तो पालिका से संबंधित सारी व्यवस्थाएं खराब हैं, लेकिन सर्वाधिक खराब व्यवस्था पथ प्रकाश की है।
उर्मिला देवी, सभासद की पराजित प्रत्याशी
कागजों तक ही सीमित वार्ड तीन का विकास
वार्ड नंबर तीन से जुड़े मोहल्ला पटेलनगर निवासी वंदना देवी का कहना है कि चेयरमैन ने वार्ड तीन को विकास के मामले में सबसे फिसड्डी बना रखा है। वार्ड नंबर तीन का विकास केवल कागजों तक ही सीमित है। हकीकत में यह वार्ड विकास से कोई वास्ता नहीं रखता है।
चेयरमैन के पुत्र ने कर रखा पालिका का बंटाधार
वार्ड तीन से जुड़े बारह पत्थर कॉलोनी निवासी चंद्रपाल मौर्य का कहना है नगर पालिका चेयरमैन छेदालाल जायसवाल का पुत्र राजू ही मुख्यरूप से नगर पालिका चेयरमैन का काम देखता है। वह गरीबों की भाषा समझना तो दूर सुनना भी पसंद नहीं करता। यही वजह है कि रईसजादों के अंदाज में नगर पालिका का संचालन हो रहा है।
फैक्ट फाइल-
आबादी सात हजार।
मतदाता 2600
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के राशनकार्ड 110
अंत्योदय राशनकार्ड 17