पीलीभीत। जिले में कई परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवन हादसे को दावत दे रहे हैं। लिंटर की परतें टूटकर गिर रही हैं, सरिया बाहर निकला दिखता है। कई भवन तो ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि ये कभी भी गिर जाएंगे। इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। खतरे के बीच नौनिहाल यहां बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। जिले में पूरनपुर के अलावा दियोरिया, गजरौला क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों का हाल ज्यादा खराब है।
70 परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर
पूरनपुर। ब्लाॅक क्षेत्र में 70 परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर हैं। इन भवनों में बच्चों को न बैठाने के लिए कहा गया है। जर्जर स्कूल भवनों के मूल्यांकन के लिए सूची लोक निर्माण विभाग को भेजी गई है। खंड शिक्षा अधिकारी विजय वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मूल्यांकन के बाद ही कितने स्कूल जर्जर और कितने मरम्मत योग्य है, इसकी सही जानकारी हो सकेगी।
छह साल से जर्जर भवन की नहीं हो सकी नीलामी
दियोरिया। गांव मुड़िया भगवंतपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन करीब छह साल से जर्जर है। अध्यापकों की ओर से विभागीय स्तर पर पत्राचार किए गए। तीन साल पूर्व जर्जर भवन को बंद करा दिया गया। इसके बाद भवन का सर्वे कराया गया, लेकिन मूल्यांकन राशि अधिक होने से भवन की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। स्कूल के अध्यापक शैलेंद्र कुमार ने बताया कि नीलामी को लेकर पैरवी की जा रही है। लोगों का कहना है कि भवन जर्जर होने से स्कूल में शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। संवाद
बरामदे की छत से टूटकर गिर रहा प्लास्टर
गजरौला। प्राथमिक विद्यालय बेबी सिंह कॉलोनी की स्थिति भी खराब है। पुराने हो चुके भवन में शिक्षण कार्य किया रहा है। बरामदे की छत से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, सरिया भी गल चुकी हैं। प्रधानाध्यापक प्रीती शर्मा ने खंड शिक्षा अधिकारी को जनवरी में प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें स्कूल की जर्जर स्थिति का जिक्र किया गया था। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कुल 28 बच्चे हैं।
वर्जन
जर्जर स्कूलों को सूचीबद्ध कर मूल्यांकन कराया गया है। नीलामी प्रक्रिया पर जल्द अमल कराया जाएगा। जर्जर भवन में शिक्षण कार्य न करने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। - अमित कुमार सिंह, बीएसए
गजरौला क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में लिंटर से गिरता प्लास्टर। संवाद