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बाघों से पीछा नहीं छूटा...अब तो तेंदुए भी आबादी में आने लगे

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पीलीभीत। अमरिया में आठ साल पहले एक बाघ ने दस्तक दी थी। अब यही सिलसिला आज एक बड़ेे कुनबे का रूप ले चुका है। आबादी क्षेत्र में रह रहे इन बाघों को हटाने के लिए वन विभाग प्रयासरत है, मगर अब तक सफलता नहीं मिली है। यह कब तक होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इधर अब तेंदुओं की चहलकदमी भी आबादी में बढ़ती जा रही है। गांव वालों को डर है कि कहीं तेंदुए भी बाघों की तरह लगातार विचरण करके अपना स्थायी ठिकाना आबादी के आसपास न बना लें। फिलहाल, वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए अभियान चला रहा है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व करीब 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैला है। प्राकृतिक संपदा से भरपूर इस जंगल में बाघों समेत अन्य वन्यजीव भी बहुतायत संख्या में है। मगर, पिछले आठ साल से कुछ बाघ जंगल से निकलकर अमरिया क्षेत्र की आबादी में डेरा जमाए हुए हैं। अमरिया के आबादी क्षेत्र में वर्ष 2012 में एक बाघ की दस्तक के साथ शुरू हुआ यह सिलसिला अब 10 के पार जा चुका है। आबादी में प्रवास करने वाले बाघों को जंगल में वापस भेजने के बारे में कई बार प्रयास किए गए। उन पर लाखों रुपये भी खर्च किए गए, मगर सब कुछ विफल रहा। अब स्थानीय क्षेत्रवासी भी बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इन्हें हटाने की मांग करने लगे हैं।
आबादी में कहीं तेंदुआ भी न बना लें आशियाना
अमरिया में पिछले तीन माह से तेंदुए का आंतक है। कहने को तो यह तेंदुआ पिछले तीन माह से यहां चहलकदमी कर रहा है, मगर सच्चाई यह है कि यह पिछले एक साल से आबादी में देखा जा रहा है। शुरूआत में एक तेंदुआ होने की बात कही जा रही थी, मगर अब कहीं दो तो कही तीन तेंदुआ होने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि तेंद़ुआ लगातार पालतू पशुओं का निवाला बना रहा है। कहीं तेंदुआ भी बाघों की तरह आबादी इलाके को अपना ठिकाना न बना लें। अगर ऐसा हो गया तो क्षेत्रवासियों के लिए एक नई समस्या खड़ी हो सकती है क्योंकि अभी तो इस इलाके के लोग बाघों से ही परेशान हैं। फिर तेंदुओं से उन्हें कौन बचाएगा।
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आबादी में रह रहे वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी सवाल
पिछले दिनों पीटीआर मुख्यालय पर वन अधिकारियों और किसानों के बीच हुई वार्ता में भी तेंदुए को पकड़ने के साथ बाघों को आबादी इलाके से हटाने का मुद्दा उठा था। देर सवेर वन विभाग को अमरिया से बाघों और तेंदुओं को हटाना ही पड़ेगा। पिछले दिनों एक बाघ के तार के फंदे में फंसने की घटना के बाद से ही यह साफ हो गया कि इस क्षेत्र पर शिकारियों की नजर भी पहुंच चुकी है। जंगल में आम आदमी की आवाजाही पर कहने को तो प्रतिबंध है, मगर आबादी क्षेत्र में कोई भी शिकारी इन वन्यजीवों तक आसानी से पहुंच सकता है। यदि समय रहते हिंसक वन्यजीवों की शिफ्टिंग दूसरी सुरक्षित जगह नहीं की गई तो कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है।
अमरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर घूम रहे बाघों को शिफ्टिंग करने की योजना पर शासन स्तर से मंथन चल रहा है। तेंदुआ को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। संभवत: जल्द ही तेंदुए को पकड़ लिया जाएगा। -संजीव कुमार, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग
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