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मनरेगा घोटाला: जांच टीमें खंगाल रहीं एपीओ के अभिलेख, बचाने में लगे मददगार

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पीलीभीत। मनरेगा में करोड़ों रुपये का घोटाला करने के आरोप में जेल भेजे गए एपीओ के खिलाफ साक्ष्य जुटाने के लिए सीडीओ के निर्देश पर जांच टीमें ब्लॉकों से मंगाकर अभिलेख खंगालने में जुट गई हैं। अनियमितताओं में फंसने के डर से मनरेगा से जुड़े अफसर भी सहमे हुए हैं। वहीं कुछ मददगार एपीओ को राहत दिलाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। एपीओ के बचाव का रास्ता तलाशाने के लिए बरेली के एक माननीय की सिफारिश भी लगवाई गई है। जनपद के कुछ बड़े नेता तो पहले से एपीओ की सिफारिश करने में लगे हैं। ब्लॉक कार्यालयों में अभिलेख छिपाने की भी कोशिश चल रही है।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में फर्जी मस्टररोल बनाकर दूसरी ग्राम पंचायतों के मजदूरों से काम कराना दर्शाते हुए और खुद के नाम से बनाई गई फर्म से करोड़ों रुपये की सामग्री खरीदकर गोलमाल करने का मामला बीते कई दिन से सुर्खियों में है। इस घपले में अमरिया ब्लॉक के एपीओ अजय कुमार और तीन रोजगार सेवक पद से बर्खास्तगी के बाद जेल भेजे जा चुके हैं। शासन के निर्देश पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया घोटाला सही निकलने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। अब इसकी तह तक पहुंचने के लिए मामले की जांच सीडीओ श्रीनिवास मिश्र को सौंपी गई है। डीएम की भी इस पूरे मामले पर पैनी निगाह है। डीएम की सख्ती से सीडीओ मामले की गहन जांच कर रहे हैं।
बताया जाता है कि एपीओ की फर्म का खाता एक निजी बैंक में है। उस फर्म में कुछ अन्य साझेदार भी हैं। उन्हें भी मनरेगा से हुए भुगतान में कुछ हिस्सा दिया गया है। इसकी जानकारी हासिल करने के लिए समस्त ब्लॉकों से मनरेगा के अभिलेख मांगे गए हैं। जांच अधिकारी को अभी कुछ ब्लॉकों से ये अभिलेख मिले नहीं हैं। जांच टीमें ब्लॉकों में दिन-रात एककर मनरेगा से जुड़े अभिलेखों को तलाश्ने में जुटी हैं। इधर, जेल में बंद एपीओ को बचाने के लिए उसके मददगार भी सक्रिय हो गए हैं। एपीओ को कुछ बड़े विभागीय अफसर और नेताओं का संरक्षण पहले से ही प्राप्त था। ऐसे में मददगार उन नेताओं के जरिए एपीओ के बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं। ब्लॉकों से किसी तरह यह मामला दबाने पर जोर दिया जा रहा है। एपीओ के कार्यकाल में कई बार मामला फंसने और उसे दबाने में जनपद ही नहीं, बल्कि बरेली के भी एक माननीय ने मदद की थी। उनसे एपीओ की करीबी थी। एपीओ के मददगार अब उन्हीं माननीयों की शरण में पहुंचे हैं। मगर, अफसर इस मामले में किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं हैं।
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खातों के लेनदेन में हस्ताक्षर पकड़े तो खुली पोल
एपीओ की शासन में शिकायत के बाद जिला स्तर पर जांच हुई तो अफसर उसी समय उसके साक्ष्य जुटाने में लग गए थे। इसी बीच शासन के एक अफसर से खातों के लेनदेन में एपीओ के हस्ताक्षर होने की जानकारी मिली। अधिकारियों ने इसे गहनता से चेक कराया तो शिकायत सही निकली। एपीओ के हस्ताक्षर किए कागजात अधिकारियों को मिल गए। इससे साबित हो गया कि एपीओ फर्म से सीधे जुड़ा है। फिर आनन-फानन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई थी। उसके बाद ही यह मामला खुला और शासन ने कार्रवाई के आदेश दिए।
ब्लॉक स्तर पर सांठगांठ से करता गया घोटाला
भले एपीओ को माननीयों के अलावा कई बड़े अफसरों का संरक्षण प्राप्त था। मगर, वह निचले स्तर पर भी अफसर और कर्मचारियों से सेटिंग बनाकर रखता था। बताते हैं कि ब्लॉक स्तर पर अफसर-कर्मचारियों से उसकी बढ़िया सांठगांठ रहती थी। अपना काम निकालने के लिए वह सभी से मिलकर चलता था। इसी वजह से वह मनरेगा में अपनी निजी फर्म के जरिए आसानी से घोटाला करता चला गया।
अफसरों ने खुद को बचाने के लिए दी थी ढील
घोटाले के उजागर होने के बाद मनरेगा से जुड़े अफसरों की नींद उड़ी हुई है। मनरेगा के एक अफसर की कार्यशैली पर पहले से ही संदेह है। अन्य विभागों में भी एपीओ की तगड़ी पैठ थी। अब जांच जैसे ही आगे बढ़ रही है, इन अफसरों को डर सताने लगा है। कुछ अफसर परदे के पीछे रहकर ब्लॉक स्तर से इस मामले में ढील डालने की कोशिश में जुटे हैं। वे यह भी कोशिश कर रहे हैं कि ब्लॉकों से पूरे अभिलेख ही जांच कमेटी को न मिल पाएं। विकास भवन में इसे लेकर चर्चा जोरों पर है।
पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अभिलेख जुटाने के लिए ब्लॉक स्तरों पर काम चल रहा है। इसका विस्तृत ब्योरा तैयार करा रहे हैं। दो-तीन दिन में अभिलेख आ जाएंगे। उनका गहनता से अध्ययन कर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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