चैत्र नवरात्र आठ अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। इसे लेकर शहर समेत जिले भर के देवी मंदिरों को सजाया-संवारा जा रहा है। पर्व से एक दिन पहले बाजार में पूजा सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही। घरों में लोग पूजापाठ की तैयारियों में जुटे रहे। खास बात यह है कि जिले की प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां यशवंतरी देवी मंदिर इस बार सीसी कैमरे की जद में रहेगा।
सीसी कैमरे की जद में रहेगा मां यशवंतरी देवी मंदिर
शहर का मां यशवंतरी मंदिर सिद्धपीठ देवी भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां बाहरी जिलों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बुजुर्गों के मुताबिक यहां मां यशवंतरी देवी ने नकटा दानव का वध किया था। तब से इस स्थान का नाम मां यशवंतरी देवी पड़ा। मान्यता है कि मां यशवंतरी के दर्शन किए बिना पूर्णागिरि दरबार की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है। मंदिर में व्यवस्थाएं दुरुस्त रहें, इसको लेकर पूरे परिसर में सीसी कैमरे लगाए गए हैं।
महामातेश्वरी मंदिर में पूरी होती है हर मनोकामना
शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में महामातेश्वरी मंदिर का भी अपना अलग महत्व है। इस मंदिर का निर्माण मां काली के उपासक, रानीखेत निवासी पंडित नरोत्तम जोशी ने वर्ष 1969 में कराया था। बताते हैं कि पंडित नरोत्तम को स्वप्न में मां ने मंदिर की स्थापना कराने का आदेश दिया था। इसके बाद यहां तमाम मुसीबतों के बाद वर्ष 1980 में देवी मां की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हो सकी। नवरात्र के दिनों में यहां पूरे नौ दिन श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
आस्था का केंद्र है गोदावरी का मां दुर्गा मंदिर
07 पीबीटीपी 10
शहर की गोदावरी कॉलोनी स्थित मां दुर्गा मंदिर वैसे तो वर्षों पुराना है, लेकिन इसे 2002 में भव्यता प्रदान की गई। पहले ग्राम्य देवी के रूप में इस मंदिर की पहचान थी। पुजारी अशोक मिश्र बताते हैं कि यहां पहले ग्रामीण पूजापाठ करते थे। कॉलोनी बसने के साथ ही मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। नवरात्र पर यहां कॉलोनी के अलावा दूर दराज से आए श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन कर मनौती मांगते हैं।
ऐसे करें मंगल कलश की स्थापना
आचार्य पंडित नारायण स्वरूप शर्मा ने बताया कि नवरात्र व्रत की शुरूआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जानी चाहिए। कलश को गंगा जल से भरना चाहिए और उसमें पंचरत्न और पंच पल्लव डालने चाहिए।
षष्ठी की हानि के कारण कम रहेगा एक व्रत
श्रीमदैवज्ञ भास्कर ज्योतिष सेवा के आचार्य सूर्य प्रकाश शर्मा के अनुसार चैत्र शुक्ल को ही ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। इस दिन से ही नवरात्र शुरू होंगे, लेकिन इस बार षष्ठी तिथि की हानि होने के कारण एक व्रत कम रहेगा और 14 अप्रैल को दुर्गाष्टमी व्रत तथा 15 अप्रैल को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा।