कलीनगर। गोमती उद्गम स्थल की झीलों में पानी की उपलब्धता, जल स्रोत और अन्य व्यवस्थाओं की पड़ताल के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से तीन सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार को माधोटांडा पहुंची। टीम ने ट्रस्ट के सदस्यों से जल स्रोतों, पानी के स्तर और अन्य जानकारियां जुटाईं। टीम तीन दिन तक रुककर नदी की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
गोमती नदी का उद्गम स्थल माधोटांडा में है। यहां पर मुख्य झील के अलावा दो अन्य झीलें हैं। उद्गम स्थल के प्राकृतिक स्रोत कई वर्षों से बंद पड़े हैं। इस वजह से पानी का प्रवाह सिर्फ झील तक ही सीमित रहता है। इसको लेकर पूर्व में कई प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। पूर्व में दिल्ली पहुंचे ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के जरिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात की। गोमती नदी से संबंधित जरूरी जानकारी साझा की और मांगें रखीं।
इसके बाद केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने वर्तमान स्थिति को परखने के निर्देश दिए। इसी क्रम में मंत्रालय से तीन सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार को माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम स्थल पहुंची। टीम में शामिल प्रोजेक्ट अधिकारी कीर्ति वर्मा के अलावा हरीश कुमार, पंकज रावत ने गोमती ट्रस्ट के सदस्य राममूर्ति सिंह और निर्भय सिंह से विस्तृत जानकारी जुटाई।
पहले दिन टीम ने उद्गम स्थल से लेकर जनपद सीमा तक गोमती नदी की वर्तमान स्थिति को समझा। जलस्रोतों के बारे में जानकारी ली। शुक्रवार को टीम नदी के जल स्रोतों की स्थिति देखने के लिए भ्रमण भी करेंगी।
नदी हमारी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि गोमती नदी हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इसका संरक्षण व सुंदरीकरण हमारी प्राथमिकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके। कहा कि यह जांच दल अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा। इसके बाद गोमती उद्गम स्थल को संरक्षित करने के कार्य किए जाएंगे।