पीलीभीत। जिले में 188 गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ने की खरीद होगी। गत वर्ष भी इतने ही गन्ना क्रय केंद्र संचालित किए गए थे। खास बात यह है कि इस बार किसी भी चीनी मिल ने सेंटर बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं किया। इसके पीछे वजह गन्ने का बढ़ा रकबा और चीनी की कम लगातार घटना बताया जा रहा है।
इस सत्र में जनपद में एक लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे पर गन्ने का उत्पादन किया गया है। जिले में 2.42 गन्ना किसान हैं। चार चीनी मिलों द्वारा गन्ने की पेराई की जाती है। आमतौर पर चीनी मिल घाटे में नहीं रहतीं, लेकिन अधिक मुनाफे के चक्कर में चीनी मिलें दूसरी मिलों के गन्ना क्रय केंद्रों को हथियाने के लिए पूरा जोर लगाती हैं।
बताते हैं कि शासन स्तर से भी क्रय केंद्रों को अपनी मिलों में समाहित करा लेती हैं। जिन चीनी मिलों के केंद्र कटते हैं, वह अपने क्रय केंद्र वापस पाने के लिए शासन में अपील दाखिल करती हैं या फिर दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों को कटवाने में लग जाती हैं। बाद में शासन में गन्ना सुरक्षण की बैठक में क्रय केंद्रों का निर्धारण होता है, मगर इस बार अजब ही नजारा देखने को मिला। किसी भी चीनी मिल द्वारा क्रय केंद्र बढ़ाने के लिए आवेदन ही नहीं किए।
विभागीय अफसरों के मुताबिक, इस बार गन्ना सुरक्षण की बैठक में गन्ना सेंटरों की संख्या पूर्ववत रखी गई है। यानी जिले में गत वर्ष की तरह इस बार 188 गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ने की खरीद होगी।
चीनी मिलों के पास क्रय केंद्रों की संख्या
मिल का नाम सेंटरों की संख्या
एलएच चीनी मिल 114
किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर 8
किसान सहकारी चीनी मिल पूरनपुर 16
बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल बरखेड़ा 50
गन्ना सुरक्षण की बैठक में इस बार क्रय केंद्रों को पूर्ववत रखा गया है। पिछले साल की तरह इस बार 188 क्रय केंद्रों पर गन्ना खरीद की जाएगी। इस बार किसी भी चीनी मिल ने क्रय केंद्र बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं किया है। - जितेंद्र कुमार मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी