पीलीभीत। साठा धान पर जिला प्रशासन की सख्ती देख इस बार खेत खाली छोड़ने के बाद किसानों का गन्ने से मोह बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है। अब तक 1313 में से 927 गांवों में गन्ना बुवाई का सर्वे कार्य पूरा होने के बाद इसके साफ संकेत मिले हैं। बकाया मूल्य भुगतान जैसी तमाम समस्याओं के बाद भी किसानों ने गन्ना पैदावार में पांच फीसदी की बढ़ोतरी की है।
गन्ना पेराई सत्र समाप्त होने से पहले शासन ने आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ना बुवाई सर्वे शुरू कराया था। इसके अंतर्गत जनपद के 1313 गांवों में गन्ना और शुगर मिल के कर्मचारियों की टीमें भेजकर गन्ना बुवाई का सर्वे कराया जा रहा है। अब तक करीब 927 गांवों में गन्ना बुवाई का सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। अभी 386 गांवों में सर्वे का काम बाकी बचा है। गन्ना विभाग के अनुसार अभी 386 गांवों का पिछले वर्षों में हुए गन्ने के उत्पादन को देखते हुए यह माना जा सकता है कि गन्ने का उत्पादन पिछले दो साल की अपेक्षा अधिक रहेगा। जिस तरह से गन्ना बुवाई की सर्वे रिपोर्ट आ रही है, उसके हिसाब से पिछले दो साल में इस बार गन्ने का रकवा बढ़ने का अनुमान है। इस बार गन्ना बुवाई का सैंपल सर्वे किया गया था। उसमें यह बताया गया कि पिछले साल की अपेक्षा गन्ना के रकवे में करीब पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी।
पिछले साल थी सात फीसदी की गिरावट
पिछले साल गन्ना उत्पादन में सात फीसदी की गिरावट आई थी। वर्ष 2018 में 1,05,558 हेक्टेयर में गन्ना बुवाई की गई थी। वहीं गत वर्ष गन्ना बुवाई का रकवा 98,072 हेक्टेयर था। वर्ष 2018 के सापेक्ष इसमें सात फीसदी की गिरावट आई थी। वहीं पिछले साल गन्ने का उत्पादन घटकर 773 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही रह गया था। गत वर्ष मात्र 657 नए सदस्य ही बन पाए थे।
गन्ने का रकवा पांच फीसदी बढ़ने के आसार
गन्ना विभाग द्वारा पूरनपुर, बीसलपुर और बरखेड़ा क्षेत्र में सर्वे कार्य चल रहा है। इन क्षेत्रों में सर्वे कार्य अंतिम दौर में है। सात जुलाई से एलएच चीनी मिल के गांवों में सर्वे कार्य होगा। 1313 गांवों में से 927 गांवों में सर्वे पूरा हो चुका है। इसमें अब तक गन्ने का रकवा 69,933 हेक्टेयर निकलकर आया है। बचे गांवों में बुवाई का रकवा बढ़ेगा।
तमाम दिक्कतों के बाद भी किसानों का मोह बरकरार
चीनी मिलों को गन्ने का भुगतान नियमानुसार आपूर्ति के 14 दिन के भीतर करना चाहिए। मगर, एलएच चीनी मिल को छोड़कर बरखेड़ा, बीसलपुर और पूरनपुर की चीनी मिलें बकाया भुगतान देने में फिसड्डी साबित हो रही हैं। किसानों को गन्ने का भुगतान साल से डेढ़ साल बाद तक मिल पाता है। फिर भी किसानों का गन्ने के प्रति मोह बरकरार है। साठा धान पर प्रतिबंध था, इसीलिए किसानों ने साठा के बजाए गन्ने को बुबाई की।
बोले किसान:
भुगतान समय से नहीं मिलता। चार साल से गन्ना समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। गन्ने की फसल बोने के अलावा कोई चारा नहीं है। - सुखदीप सिंह लाडी, किसान, बराही
मैंने इस बार गन्ने की वैरायटी 3684 बोई है। अमूमन किसान गन्ने की 238 और 218 वैरायटी ही बोते हैं। इस बार गन्ने का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। - मनवीर सिंह, किसान, दुधियाखुर्द
बोले अधिकारी:
गन्ने का सर्वे कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक करीब 70 फीसदी से अधिक सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। सैंपल सर्वे के मुताबिक इस बार पांच फीसदी गन्ने का रकवा बढ़ने के आसार हैं। - जितेंद्र मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी