सरकार ग्रामीण अंचल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैय्या कराने को पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को उस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसकी उन्हें दरकार है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र न्यूरिया का भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां सात रोग विशेषज्ञों में मात्र एक डॉक्टर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। खास बात यह है कि यहां की एक महिला डॉक्टर समेत तीन डॉक्टर अरसे से नदारद हैं।
तीस शैय्या वाले इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से क्षेत्र की करीब एक लाख की आबादी जुड़ी है। यहां बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी आदि के पद सर्जित हैं, लेकिन इनमें से यहां कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं है।
सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. प्रशांत कुमार है, लेकिन उन्हें जिला मलेरिया अधिकारी का भी चार्ज दिया गया है, ऐसे में वह भी व्यस्तता के चलते अधिकांश समय ओपीडी को नहीं दे पाते। ऐसे में अस्पताल में इलाज की आस में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर न मिलने के चलते उन्हें या तो जिला मुख्यालय या फिर प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
दो डॉक्टर छुट्टी पर, तीन लंबे अरसे से नदारद
सीएचसी में तैनात डॉ. इरा भारद्वाज 26 अप्रैल से और डॉ. सुधीर व्यास 26 मई से लंबी छुट्टी पर गए हुए हैं। खास बात यह है कि यहां तैनात महिला डॉक्टर डॉ. ताहिरा पिछले दो साल से, डॉ. राजेंद्र गोले एक तथा डॉ. राजीव पिछले पांच साल से बिना सूचना नदारद हैं। विभाग को भी इनकी कोई खैर खबर नहीं।
जिम्मेदारी महज दो डॉक्टरों के कंधों पर
रोजाना करीब सौ से डेढ़ सौ ओपीडी करने वाले इस अस्पताल की जिम्मेदारी प्रभारी अधीक्षक डॉ. प्रशांत कुमार व डॉ. रमेश कुमार के कंधों पर है। प्रभारी अधीक्षक के जिला मुख्यालय चले जाने के बाद अधिकतर मरीजों को डॉ. रमेश कुमार ही देखते हैं। इसके अलावा यहां एक आयुष चिकित्सक, चार स्टाफ नर्स, दो फार्मेसिस्ट और एक लैब टेक्नीशियन भी तैनात हैं।
अव्यवस्थाओं का है बोलबाला
डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की किल्लत के चलते इस अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। पिछले एक दो माह से तो यहां ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी घटी है। अस्पताल परिसर में ही कूड़े के ढेर के अलावा आवारा पशु भी आसानी से घूमते देखे जा सकते हैं। अकसर बिजली कटौती होने के चलते अस्पताल में जनरेटर भी लगाया गया है, लेकिन यह जनरेटर मात्र एक्सरे आदि करने के लिए चलाया जाता है। भीषण गर्मी में पंखे आदि न चलने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में अब पहले जैसा इलाज नहीं
अस्पताल में देर रात डिलीवरी करवाई थी, लेकिन अगली सुबह तक यहां कोई डॉक्टर बच्चे का हाल जानने तक नहीं आया। सरकारी अस्पतालों में अब पहले जैसा इलाज नहीं रहा।
- उर्मिला देवी, मडलिया जनकपुरी।
गरीब गांव में ही कराने लगे हैं इलाज
सरकारी अस्पताल से करीब एक लाख की आबादी जुड़ी है, लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं हैं। गरीब मरीज अब यहां का हाल जानकर या तो जिला अस्पताल जाने लगे हैं या फिर गांव में ही झोलाछापों से इलाज करा रहे हैं।
- अब्दुल शहबाज, न्यूरिया
सीमित संसाधन से हो रहे हैं बेहतर प्रयास
सीएचसी में स्टाफ की कमी है। सीमित स्टाफ व संसाधनों से ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के प्रयास किए जाते है। लंबे अरसे से गैरहाजिर चल रहे डॉक्टरों व विशेषज्ञों की कमी के बाबत उच्चाधिकरियों को पूर्व में ही अवगत कराया जा चुका है।
- डॉ. प्रशांत कुमार, प्रभारी अधीक्षक सीएचसी