नेपाल सीमा से
घुसपैठ की आशंका को लेकर कमिश्नर प्रमांशु कुमार व डीआईजी आरकेएस राठौर ने
एसएसबी के अधिकारियों के साथ चूका गेस्ट हाउस पर गोपनीय बैठक की और बार्डर
पर संदिग्धों की आवाजाही रोकने की रणनीति बनाई।
पीलीभीत जिले की सीमाएं
नेपाल व उत्तराखंड सीमा से जुड़ी हुई हैं। नेपाल बार्डर सीमा से लगा हुआ
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का विशाल जंगल है। खुफिया एजेंसियों ने नगरियाखुर्द
के जंगलों से गुजरने वाले बीहड़ रास्तों से आतंकियों को भारत में घुसपैठ की
कोशिश करने की सूचना दी थी। इसी को देखते हुए गुरुवार को कमिश्नर प्रमांशु
कुमार, डीआईजी आरकेएस राठौर के साथ चूका पहुंचे और वहां एसएसबी अधिकारियों
के साथ बैठक की। सूत्र बताते हैं कि कमिश्नर ने बार्डर से जुड़े रास्तों व
मैप आदि देखा। एसएसबी की स्थापित चौकियों व गश्त आदि की जानकारी ली। इसके
बाद संदिग्धों की बार्डर पर आवाजाही रोकने के लिए रणनीति बनाई। बैठक में
डीएम ओएन सिंह, एसपी जेके शाही, एसएसबी डीआईजी केपी सिंह, सेनानायक जेपी
राना मौजूद रहे।
औद्योगिक हब की जमीन देख्ाने पहुंचे कमिश्नर से ग्रामीणों ने लगाई गुहार
मझोला। थाना अमरिया क्षेत्र के गांव भरा पचपेड़ा में औद्योगिक हब बनाए जाने के लिए प्रस्तावित 1200 एकड़ जमीन का कमिश्नर प्रमांशु यादव ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें मौके पर 19 सौ एकड़ जमीन मिली। उधर, इस जमीन पर विस्थापित 142 परिवारों के मुखिया आशियाना उजड़ने की आशंका पर कमिश्नर से मिलने की कोशिश की तो पुलिस ने पहले उन्हें घरों के अंदर खदेड़ दिया। बाद में ग्राम बिरहैनी के प्रधान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल को कमिश्नर से मिलने दिया गया। कमिश्नर ने विस्थापित परिवारों को बेघर न करने का आश्वासन दिया।
कमिश्नर प्रमांशु यादव डीएम ओएन सिंह के साथ गुरुवार की शाम करीब पांच बजे गांव भरा पचपेड़ा पहुंचे। उन्हाेंने औद्योगिक हब के लिए प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण किया। जहां 19 सौ एकड़ जमीन मिली। मौके पर मौजूद राजस्व अमले ने उन्हें बाकी जमीन देवहा नदी में कटने की जानकारी दी। कमिश्नर के पहुंचने से पूर्व इस जमीन पर विस्थापित 142 परिवारों को आशंका थी कि औद्योगिक हब बनने पर उन्हें उजाड़ दिया जाएगा। इस पर ग्रामीण कमिश्नर को अपना दुखड़ा सुनाने के लिए सड़क पर आ गए, लेकिन पुलिस ने उन्हें खदेड़ कर घर में घुसने पर मजबूर कर दिया। जब कमिश्नर पहुंचे तो पुलिस ने ग्राम प्रधान के नेतृत्व में पांच लोगों को मिलने की इजाजत दी। प्रतिनिधि मंडल ने कमिश्नर को बताया कि आशियाने उजाड़ने से गरीब बेसहारा हो जाएंगे। इसलिए उन्हें न उजाड़ा जाए। कमिश्नर ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि किसी को बेघर नहीं किया जाएगा। उन्हें रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कमिश्नर ने वहां मौजूद 107 एकड़ रेतेली जमीन पर पौधारोपण कर उसे ग्रीन लैंड के रूप में डेवलप करने के भी निर्देश वन विभाग के अधिकारियों को दिए। इस दौरान एडीएम आलोक सिंह, एसडीएम, तहसीलदार व लेखपाल मौजूद रहे।