पीलीभीत। देश और प्रदेश की सरकार पूरी ताकत से कोरोना से जंग लड़ रही है। वह तो शुक्र है कि एक महीने के लॉकडाउन में प्रशासन ने कोरोना के केस बढ़ने से रोक लिए। मगर कोरोना संक्रमितों की दुर्भाग्य से संख्या बढ़ती तो स्वास्थ्य विभाग के पास न तो वेंटिलेटर थे, न ही ब्लड बैंक में खून का स्टॉक।
स्वास्थ्य विभाग की आधी अधूरी तैयारियों को देखकर तो यही लगता है कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की रात दिन की मेहनत के बावजूद विभाग के अधिकारी योजनाबद्ध तरीके से काम करने में बहुत पीछे हैं। तभी तो जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ऐसे संकट के समय मात्र 30 यूनिट (बोतल) रक्त ही है, जबकि सामान्य दिनों में भी ब्लड बैंक में 150 से 200 यूनिट तक रक्त रहता है।
जनपद की आबादी 20 लाख है। इसके साथ ही तराई बेल्ट की सीमा लखीमपुर, शाहजहांपुर, बरेली, उत्तराखंड के अलावा नेपाल से भी लगती है। यहां दो कोरोना पॉजिटिव केस भी मिल चुके हैं। अब तक तीन सौ से ज्यादा सैंपल जांच के लिए भी भेजे जा चुके हैं। इतनी बड़ी आबादी वाले एरिया के जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इन दिनों मात्र 30 यूनिट ब्लड ही बचा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जिस तरह से देश के अंदर कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसमें ब्लड बैंक में कम से कम 250 यूनिट तक रक्त का स्टॉक अपेक्षित है। अगर ब्लड बैंक में रक्त की कमी है तो थैलीसीमिया, एनेमिक और गर्भवती महिलाओं और लावारिसों के इलाज में दिक्कत आ सकती है। हालांकि लॉकडाउन की अवधि एक महीने बीतने के बाद सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने आम नागरिकों से स्वेच्छा से रक्तदान करने की अपील की है। यह अलग बात है कि इस समय लॉकडाउन के चलते रक्तदान करने में आम लोग बहुत ज्यादा रुचि भी नहीं ले रहे हैं।
1997 में बना था ब्लड बैंक
जिला अस्पताल में वर्ष 1997 में ब्लड बैंक की स्थापना की गई थी। उस दौरान ब्लड बैंक जिला अस्पताल भवन में स्थापित किया गया था। तीन साल बाद यानी वर्ष 2000 में ब्लड बैंक को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। 200 यूनिट की क्षमता वाली ब्लड बैंक अब तक पीलीभीत ही बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से आने वाले मरीजों के लिए भी वरदान साबित होता आ रहा है। हालांकि शहर में एक अन्य निजी अस्पताल में भी ब्लड बैंक है, जिसकी क्षमता 700 यूनिट है। मगर, वहां भी काफी कम यूनिट ब्लड रह गया है।
रक्तदान शिविर पर लॉकडाउन का असर
कोविड-19 को लेकर चल रहे लॉकडाउन का असर जिला अस्पताल स्थित सरकारी ब्लड बैंक पर भी पड़ा है। लॉकडाउन के चलते ब्लड बैंक में मंगलवार को मात्र 30 यूनिट रक्त ही रह गया। इसमें 13 यूनिट रक्त की अभी जांच की जानी है। ब्लड बैंक में ए निगेटिव और एबी निगेटिव खून का टोटा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ब्लड बैंक में एक तरह से मात्र 17 यूनिट रक्त ही है, जिसका उपयोग किया जा सकता है।
12 थैलीसीमिया हैं पंजीकृत
सरकारी ब्लड बैंक से 12 थैलीसीमिया पीड़ित पंजीकृत हैं। इनमें प्रत्येक मरीज को महीने में एक से दो यूनिट रक्त की जरुरत होती है। स्टॉक में जमा रक्त से इनका इलाज हो रहा है। स्टॉक में ब्लड की कमी होने से इनके इलाज में परेशानी खड़ी हो सकती है।
ब्लड बैंक में रक्त की यह है स्थिति
ब्लड ग्रुप/यूनिट
ए पॉजिटिव 02
बी पॉजिटिव 06
ओ पॉजिटिव 02
एबी पॉजिटिव 03
ए निगेटिव 00
बी निगेटिव 02
ओ निगेटिव 02
एबी निगेटिव 00
सीएमओ की अपील- रक्तदान को आगे आएं
सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने रक्तदाताओं ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। उन्होंने अपील की कि स्वयंसेवी संगठन के सदस्य और युवा ब्लड बैंक पहुंचकर स्वेच्छा से रक्तदान करें, ताकि थैलीसीमिया समेत अन्य मरीजों को जरूरत पड़ने पर आसानी से रक्त मुहैया कराया जा सके।
स्वस्थ लोग बेहिचक करें रक्तदान
18 से 55 वर्ष तक का कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं होती है। तीन माह के अंतराल पर पुन: रक्तदान किया जा सकता है। - डॉ. महावीर सिंह, प्रभारी, ब्लड बैंक