पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में मतदान के दौरान तमाम लोग मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह गए। जबकि इनके पास वोटर आईडी, आधार कार्ड व अन्य पहचान पत्र आदि भी था। बावजूद इन्हें मतदान करने से रोक दिया गया, क्योंकि इनके नाम मतदाता सूची में या तो गलत अंकित थे या फिर सूची से नाम गायब कर दिए गए।
तीसरे चरण में शनिवार को हुए मतदान के दौरान तमाम मतदाता हलकान दिखे। बिलसंडा ब्लाक के पसिगंवा में बुजुर्ग मालती देवी लाठी के सहारे मतदान केंद्र पहुंचीं। हाथ में पहचान पत्र भी था, लेकिन मतदान अधिकारी ने सूची में नाम न होने पर उन्हें वापस जाने को कह दिया। तमतमाती हुई मालती देवी दुबारा राशन कार्ड लेकर पहुंची, लेकिन इस बार भी उनका नाम मतदाता सूची न होना बताकर उन्हें मतदान से रोक दिया। इसी ब्लाक गांव लिलहर मुड़िया गांव में तमाम ग्रामीण मतदान केंद्र पहुंचे, लेकिन मतदान केंद्र में मौजूद मतदाता सूची में नाम न होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। बबूरा गांव के सियाराम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। पहचान पत्र होने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची में गलत होने के कारण उन्हें वोट डालने से वंचित होना पड़ा।
बीसलपुर ब्लाक के शहजबाजपुर मतदान केंद्र पर तो करीब 51 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में गलत दर्ज किए गए थे, इन सभी को वोटिंग करने से रोक दिया गया। जिसको लेकर ग्रामीणों में खासा रोष देखा गया। कुछ ग्रामीणों ने मामले की शिकायत मतदान केंद्र का निरीक्षण करने आए अधिकारियों से भी की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।