कलीनगर। कलीनगर। तहसील क्षेत्र के प्रमुख माधोटांडा रजवाहा, पूरनपुर रजवाहा और सहायक माइनरों के किनारों से रेतीली मिट्टी और सिल्ट का उठान बंद करा दिया गया है। नीलामी की शर्तों और पारदर्शिता को लेकर जनता के बीच खड़े हुए विवाद और मामला सुर्खियों में आने के बाद सिंचाई और खनन विभाग बैकफुट पर आ गया है।
दरअसल, खनन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत चार प्लॉटों की नीलामी की थी। ठेकेदारों द्वारा रॉयल्टी और टैक्स जमा करने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रेत का उठान शुरू हुआ था, जिसका इस्तेमाल निजी प्लाटिंग और कॉलोनियों में धड़ल्ले से किया जा रहा था। जनता के विरोध और जांच की मांग के बाद एसडीओ योगेंद्र सिंह गौतम ने कार्य रोके जाने की पुष्टि की है। विभाग के अनुसार अब तक चार स्थानों पर 14 हजार घनमीटर सिल्ट उठान को लेकर ही पत्राचार हुआ है, लेकिन अब इसकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। बता दें कि माधोटांडा रजवाहा, पूरनपुर रजवाहा और आधा दर्जन से अधिक सहायक माइनरों के किनारों पर सालों से सिल्ट जमा थी। सरकार हर साल इसकी सफाई पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाती है। इस बार पहली बार विभाग ने इस सिल्ट को नीलामी के जरिए बेचने का रास्ता निकाला। खनन विभाग ने चार प्लॉटों की नीलामी कर ठेकेदारों को रॉयल्टी और जीएसटी जमा कराकर उठान की हरी झंडी दे दी। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अनुमति मिलते ही पूरनपुर रजवाहा और माइनरों से दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए रेत और सिल्ट का अवैध रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू हो गया।
इस रेतीली मिट्टी को नियमों को ताक पर रखकर विकसित हो रही निजी कॉलोनियों, अवैध प्लाटिंग और निर्माणाधीन परियोजनाओं में ऊंचे दामों पर खपाया गया। नीलामी किन शर्तों और मानकों पर हुई, ठेकेदारों ने तय मात्रा से कितना अधिक रेत उठाया, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। मामला तूल पकड़ते देख अफसरों ने आनन-फानन में काम रुकवा दिया है। संवाद
फिलहाल क्षेत्र में सिल्ट उठान का कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है। शारदा सागर खंड की ओर से अलग-अलग चार स्थानों पर 14 हजार घनमीटर सिल्ट उठान को लेकर खनन विभाग से पत्राचार किया गया है। - योगेंद्र सिंह गौतम, एसडीओ, सिंचाई विभाग