पीलीभीत। 19 जिलों के कई आयुर्वेदिक दवाखानों में कच्ची औषधि से तैयार कर आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराने वाला स्थानीय आयुर्वेदिक औषधि निर्माणशाला दवा बनाने वाली पुरानी मशीनों से संघर्ष कर रहा है। पुरानी होने के चलते मशीनों में जंग लग चुकी है। आए दिन उपकरणों में खराबी से एक तरफ दवाओं के आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं, दूसरी ओर मरम्मत कराने में समय व धनराशि खर्च हो रहे हैं, जिससे विभाग को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि इसके लिए 1.35 करोड़ रुपये की राशि मिल सकती है। इससे फॉर्मेसी को संजीवनी मिल सकती है।
ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक औषधि निर्माणशाला उत्तर प्रदेश की दो फार्मेसी में से एक है, जो उत्तर प्रदेश के सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में दवाओं की आपूर्ति करती है। वर्तमान में यहां से 19 जिलों में 405 चिकित्सालयों में आयुर्वेदिक दवाओं के रूप में क्वाथ, चूर्ण, वटी, तेल सहित अन्य दवाएं वितरित की जाती हैं, लेकिन 19 जिलों का भार झेल रही फार्मेसी की मशीनें इन दिनों अपनी जंग लग चुकी मशीनों से ही जंग लड़ रही है।
बता दें कि 50 साल से अधिक पुरानी मशीनों के चलते आए दिन इसके उपकरणों में खराब आ रही है। इनमें डिसइंट्रीगेटर, इंपैक्ट पल्पलाइजर, ब्लेंडर, खरल, एयर ड्रायर सभी की स्थिति काफी नाजुक है। आए दिन कोई न कोई मशीन के भाग में खराबी आ जाती है, जिससे दवाएं निर्माण का काम प्रभावित हो जाता है। वर्तमान में भी पल्पलाइजर व डिसइंट्रीगेटर मशीन के हालात काफी खराब है व दवाएं भी ठीक से नहीं बना पा रही हैं। संवाद