पीलीभीत। जंगल से सटे गांवों के किसानों को बांस और केले की खेती के प्रति जागरूक किया जाएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए पीटीआर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से प्रयास शुरू किए गए हैं। इसके लिए बहराइच और सीतापुर के बांस की खेती से जुड़े प्रगतिशाल किसान पीटीआर मुख्यालय पर 26 नवंबर को कार्यशाला में भाग लेकर स्थानीय किसानों को जागरूक करेंगे।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी चुनौती जारी हैं। जंगल सीमा से सटे करीब 75 गांव मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले में संवेदनशील माने जाते हैं। पूर्व में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
इसके पीछे जंगल से सटे गांवों में तेजी से बढ़ रही गन्ने की खेती भी वजह मानी जा रही है। जंगल से बाहर निकलकर बाघ गन्ने के खेतों में आकर डेरा जमाते हैं। इससे संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसको रोकने के लिए पीटीआर की ओर से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से एक और प्रयास शुरू किया जा रहा है।
इसके तहत बांस और केले की खेती से जुड़े बहराइच और सीतापुर के दो प्रगतिशील किसानों को बुलाकर जनपद में जंगल से सटे गांवों के प्रगतिशील किसानों को जागरूक कराया जाएगा। इसमें सीतापुर के कमलेश और बहराइच संजय श्रीवास्तव शामिल हैं। दोनों अपने अनुभवों को साझा कर बांस और केले की फसल को उगाने के साथ आय बढ़ाने की जानकारी देकर जागरूक करेंगे। विभागीय मुख्यालय में 26 नवंबर को कार्यशाला होगी। जिसमें जनपद के सौ किसान भाग लेंगे।