कछुआ दिवस पर गोमती उद्धगम स्थल पर आयोजित कार्यशाला में मौजूद लोग । संवाद
कलीनगर। कछुओं के संरक्षण के लिए जरूरी है कि उनके वास स्थलों में प्लास्टिक की सामग्री फेकने से परहेज किया जाए। यह बात गोमती उद्गम स्थल पर आयोजित कार्यशाला में पीटीआर के एसडीओ रमेश चौहान ने कही।
विश्व कछुआ दिवस पर गोमती उद्गम स्थल पर पीटीआर की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ताओं का कहना था कि उद्गम स्थल की झीलों में करीब 12 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। मुख्य झील में कछुओं की मौजूदगी आसानी से देखी जा सकती है।
एसडीएम रमेश चौहान ने कहा कि तराई के इस जिले में कछुओं की बेहतर मौजूदगी है। नदियों के अलावा जलाशयों और गोमती उद्गम स्थल की झीलों में भी काफी संख्या में कछुए हैं। ऐसे में जरूरी है संरक्षण की दिशा में आमजन भी जागरूक हो।
इसके चलते झील में प्लास्टिक की सामग्री डालने से परहेज करें। झील की सफाई का भी विशेष ध्यान रखें। कार्यशाला में डब्ल्यूटीआई की प्रांजलि भुजबल और जीव वैज्ञानिक लवप्रीत सिंह ने भी लोगों को जागरूक किया। इस मौके पर ट्रस्ट के सदस्य राममूर्ति सिंह भी मौजूद रहे।