बारिश और ओलावृष्टि से अभी तक 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान वालों को ही मुआवजा मिला था। दूसरे चरण में 50 प्रतिशत से कम नुकसान वालों को भी मुआवजा मिलने की बात शासन ने कहा था। इसके तहत प्रशासन ने 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजी है। इस रिपोर्ट के अनुसार जिले में बारिश और ओलावृष्टि से 3465 हेक्टेअर भूमि में खड़ी गेहूं की फसल में 25 से 50 प्रतिशत से कम नुकसान हुआ है।
एक माह पूर्व हुई ओलावृष्टि और उसके बाद हुई अतिवृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल चौपट हो गई थी। प्रशासन ने क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिसमें 4288 हेक्टेअर में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान दर्शाया गया था। इस नुकसान की भरपाई के लिए शासन से 2.19 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में ऐसे किसान छूट गए जिनका नुकसान 50 प्रतिशत से कम था।
इस पर शासन ने उन खेतों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए, जिनमें खड़ी गेहूं की फसल 25 प्रतिशत से अधिक व 50 प्रतिशत से कम क्षति हुई थी। एक सप्ताह में प्रशासन ने तीनों तहसीलों से सर्वे कराकर रिपोर्ट शासन को भेज दी। इस रिपोर्ट के अनुसार जिले में 3464.99 हेक्टेअर क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं की फसल में 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इसमें 2543.36 हेक्टेअर क्षेत्रफल लघु सीमांत किसानों (पांच एकड़ से कम जोत वाले) और 921.38 हेक्टेअर सीमांत किसानों का है।
कितना मुआवजा मिलेगा यह तय नहीं
फसलों के 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से मुआवजा दिए जाने का नियम है। प्रशासन ने इसी आधार पर 4288 हेक्टेअर के लिए 3.63 करोड़ की मांग की थी लेकिन 50 प्रतिशत से कम नुकसान पर कितना मुआवजा मिलेगा इसका कोई मानक अभी तय नहीं है और न जिला प्रशासन को इस बाबत कोई गाइड लाइन मिली है।
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50 प्रतिशत से अधिक नुकसान की रिपोर्ट पर जो धनराशि प्राप्त हुई थी उसे किसानों में वितरित करा दी गई। अब 50 प्रतिशत से कम नुकसान का आंकलन पूरा कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। शासन से जब और जितना मुआवजा मिलेगा उसी के अनुसार वितरण कराया जाएगा।
- ओएन सिंह, डीएम