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जमुनिया में पशुओं में फैली बीमारी, एक सप्ताह में 17 पशु मरे

Wed, 06 Sep 2017 07:06 PM IST
जमुनिया (पीलीभीत)।
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डेमाो - फोटो : अमर उजाला
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दो दर्जन पशु बीमार, अभी तक नहीं पहुंची पशु चिकित्सक की टीम
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पशुओं का बीमा होता तो मिलता मुआवजा, ग्रामीणों को नहीं है जानकारी
बीते एक सप्ताह में जमुनिया गांव में डेढ़ दर्जन पशुओं की मौत हो गई। इससे गांव के पशु पालकों में हड़कंप है। इसके बाद भी पशु चिकित्सा विभाग की ओर से एक भी डॉक्टर गांव में नहीं पहुंचा।  
पशुपालकों ने बताया कि करीब एक सप्ताह से पशुओं में बीमारी फैली हुई है। पशुओं में पहले बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं और कुछ समय बाद पशु मर जाते हैं। इस बीमारी के चलते पिछले एक सप्ताह में 17 पशुओं की मौत हो चुकी है। दो दर्जन पशु बीमारी से जूझ रहे हैं। एक पशुपालक के तो तीन पशुओं की मौत बुखार से हो गई है। पशुचिकित्सकों की अनदेखी में पशुपालकों को भारी पड़ रही है। ग्रामीण मृत पशुओं को गांव के बाहर फेंक दे रहे हैं। इससे दुर्गंध भी फैल रही है। 
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इन ग्रामीणों के पशुओं की हो चुकी है मौत 
 गांव में पशुपालक परमेश्वरी दयाल पासवान के दो, राममूर्तिलाल वर्मा के तीन, कांशीराम मौर्य के एक, राधेश्याम पासवान के एक, कांता प्रसाद के एक, शिवकुमार पासवान के एक, बसंत लाल के एक, जानकी प्रसाद के एक, कमंछादेवी के दो, सीताराम के एक, बाबा वीरबल के एक, रामनाथ राठौर के एक पशु की मौत हो गई। इसके अलावा बुधवार एक आवारा साड़ की भी मौत हो गई।  

एक सप्ताह पहले मेरे पशु को बुखार आया। कुछ देर बाद वह मर गया। सूचना के बाद भी अभी तक पशु डॉक्टरों की टीम गांव नहीं पहुंची है। गांव में अभी तक किसी को जानकारी नहीं है कि पशुओं का बीमा होता है और बीमा की क्या प्रक्रिया होती है। यह भी कोई बताने नहीं आया।
राधेश्याम, पशुपालक 

मेरे तीन पशुओं की मौत हो चुकी है। डॉक्टर की टीम अभी तक नहीं आई है। गांव में रोज एक-दो पशु मर रहे हैं । पशुओं में यह कौन सी बीमारी फैली है और इसके बचाव के क्या उपाय हैं, आदि की जानकारी भी देने कोई नहीं आया।   
राममूर्तिलाल वर्मा, पशुपालक   

ग्रामीण जो लक्षण बता रहे हैं वह विषाक्त भोजन (चारा) के हैं। तमाम लोग फसलों में कीटनाशक का छिड़काव करते हैं। पशु उन चारों को खा लेते हैं। इन हरे चारे के माध्यम से पेट में जहर बन जाता है। इससे पशु का पेट फूलना, झाग आना, दम घुटने के साथ अज्ञात बुखार के द्वारा पशु को समझने का मौका नहीं मिल पाता और मौत ही जाती है। सूचना मिलने पर पशु का इलाज करने जाता हूं। पशुओं का एक साल का बीमा होता है। पशुपालक पशुओं का बीमा कराएं।  पशुओं का 99 प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है।
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बंगाली बाबू, पशुधन प्रसार अधिकारी 

गांव में टीकाकरण कराया गया था। बीमारी की कोई सूचना नहीं मिली। आज अचानक पशुओं के मरने की बात सामने आई है। इस पर टीम को गांव भेज दिया गया है। अब और पशुओं की मौत न हो इसके लिए टीकाकरण कराया जा रहा है।       
डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी 
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