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डॉक्टर बता रहे जिंदा, घरवाले कह रहे मर गया किशोर 

Fri, 19 Aug 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
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हालत - फोटो : अमर उजाला
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हंगामे की आशंका पर अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को दी सूचना 
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फोर्स लेकर पहुंचे सीओ सिटी ने जुटाई जानकारी 
 दो दिन पहले पेट की दर्द की शिकायत पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए 13 वर्षीय किशोर की अचानक हालत बिगड़ गई। घरवाले बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे मरा मानकर अस्पताल स्टाफ से उलझ गए। बाद में घर की महिलाओं को बच्चे के पास छोड़कर चले गए। हंगामे की आशंका पर डॉक्टर ने पुलिस को सूचना दे दी। सीओ सिटी फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे और जानकारी जुटाई। दूसरे दिन घरवालों को बुलाकर उन्हें बच्चे के जिंदा होने की जानकारी दी, लेकिन वे यह मानने को तैयार नहीं हैं।
न्यूरिया क्षेत्र के ललपुरिया गांव निवासी किसान बबलू के तेरह वर्षीय इकलौते बेटे करन को बुधवार शाम स्टेशन रोड स्थित अनुज नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उसे पेट में दर्द की शिकायत थी। डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। गुरुवार को बच्चे को बुखार हो गया और बेहोशी होने लगी। इस पर डॉक्टर ने कुछ जांचें कराईं। इनमें बच्चे की हालत नाजुक निकली। कुछ ही देर में उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हालांकि हृदयगति ठीक थी। इस पर डॉक्टर ने एक अन्य निजी अस्पताल से संपर्क कर बच्चे को वेंटिलेटर पर रखने का परामर्श घरवालों को दिया। डॉक्टर का आरोप है कि इस पर घरवालों ने उलझना शुरू कर दिया। बोले, बच्चा मर गया है। इसके बाद घर के सभी पुरुष सदस्य चले गए। केवल महिलाएं ही अस्पताल में रह गईं। ऐसे में हंगामे की आशंका होने पर अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दे दी। तुरंत ही सीओ सिटी निर्मल बिष्ट, इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतुल प्रधान पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और बच्चे की हालत के बारे में पूछताछ की। पुलिस ने घरवालों को फोन कर अस्पताल आने को कहा लेकिन रात भर कोई नहीं आया। पुलिस ने अस्पताल में मौजूद बच्चेे के परिवार की महिलाओं से भी जानकारी की। शुक्रवार को घरवालों को बुलाकर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए बच्चे को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने को कहा। इस पर घरवाले फिर डॉक्टर से उलझ गए।   
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प्रशासन ने जिला अस्पताल की टीम से कराई जांच
पीलीभीत। शुक्रवार को किशोर की हालत और बिगड़ गई। घरवाले उसे किसी कीमत पर जिंदा मानने को तैयार नहीं हैं। वे अफसरों को डॉक्टर के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग करते रहे। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने घरवालों को बुलाकर बात भी की लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। अस्पताल प्रशासन के कहने पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. एसके मित्रा,  डॉ. केएन तिवारी और डॉ. सतीश गंगवार अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घरवालों के सामने बच्चे का चेकअप कर उसके जिंदा होने की पुष्टि की लेकिन घरवाले नहीं मानें। मामला उलझता देख सुनगढ़ी इंस्पेक्टर अतुल प्रधान ने सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र शर्मा को घटना से अवगत कराया। इसके जिला अस्पताल के डॉ. वीके शर्मा, डॉ. लाखन सिंह को जांच के लिए भेजा गया। दोनों ने बच्चे को जीवित, लेकिन उसकी हालत गंभीर बताई। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे का दिल काम कर रहा है। सांस मशीन से दी जा रही है।

घरवाले बोले, लिखकर दें जिंदा है करन 
पीलीभीत। घरवाले करन को दूसरे अस्पताल में ले जाने को तो तैयार हैं लेकिन वे चाहते हैं कि अस्पताल प्रशासन उन्हें यह लिखकर दे कि रेफर करते वक्त वह जिंदा है। पांच घंटे की बातचीत के बाद दोपहर करीब तीन बजे निजी अस्पताल के डॉक्टर ने रेफर रिपोर्ट तैयार कर दी। बाद में जिला अस्पताल से आई टीम से भी घरवालों ने करन के जिंदा होने की बात लिखकर देने को कहा लेकिन टीम ने मना कर दिया। इससे घरवाले फिर बिदक गए। उनका कहना था कि करन मशीन से सांस देने की वजह से ही जिंदा है।

करन को दो दिन पहले भर्ती किया था। गुरुवार शाम हालत सीरियस होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी गई, इससे घरवालों ने बच्चे को मृत मान लिया। कोई बखेड़ा न हो, इसलिए पुलिस को सूचना दी गई। बच्चे का इलाज जारी है। अन्य डॉक्टरों ने भी जांच कर बच्चे को जिंदा बताया है लेकिन घर वाले यह मानने को तैयार नहीं है।
- डॉ. डीके गंगवार, अनुज नर्सिंग होम

दोनों पक्षों से तहरीर मिली है। घरवालों ने डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे के मरने की तहरीर दी है। जबकि डॉक्टरों के मुताबिक वह जिंदा है। दोनों के बीच सुलह के प्रयास जारी हैं। 
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- अतुल प्रधान, इंस्पेक्टर सुनगढ़ी 



डीएम से की वैंटीलेटर व्यवस्था की मांग
पीलीभीत। किशोर के घर वालों द्वारा किसी अन्य अस्पताल में न ले जाए जाने पर अनुज नर्सिंग होम के संचालक डा. डीके गंगवार ने डीएम को पत्र भेजा है। पत्र में किशोर की बिगड़ती हालत का जिक्र किया गया है। उसके स्वास्थ्य सुधार के लिए वेंटीलेटर की व्यवस्था कराए जाने की मांग की है। इसके अलावा अस्पताल में हंगामा किए जाने की आशंका जाहिर करते हुए सुरक्षा की मांग की गई है।
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