जनपद के किसानों को फल और अनाज की बिक्री के लिए भटकना नही पड़ेगा। ई-मार्ट के जरिए किसान घर बैठे अपनी फसल को देश के किसी भी कोने में बेच सकेंगे। किसानों को यह सुविधा जन सुविधा केंद्रों के माध्यम से मिल सकेगी। इसके लिए किसानों को जन सुविधा केंद्र जाकर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क होगा। यह सुविधा उन किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी, जो हर साल कोई न कोई न फसल की पैदावार करते हैं, मगर बिक्री के लिए कोई प्लेटफॉर्म न मिलने पर उन्हें फसल को स्थानीय बाजारों में औने पौने दामों में बेचना पड़ता है।
प्रदेश में पीलीभीत कृषि प्रधान जनपद की श्रेणी में शुमार है। यहां धान, गेहूं और गन्ने की खासी पैदावार की जाती है। हालांकि कुछ किसान इसके अलावा सब्जी, मेंथा, केला आदि की फसलें भी पैदा करते हैं। वहीं कुछ जागरूक किसान देश समेत विदेशों में होने वाली फसलों जैसे काला गेहूं, काला धान, आइस बॉक्स तरबूज, खीरा, स्ट्रॉबेरी आदि की भी खेती करते हैं, मगर जनपद में इन फसलों की बिक्री के लिए कोई उचित मंडी या प्लेटफॉर्म न होने से किसान या तो अपनी फसलों को महानगरों में ले जाकर बेचते हैं या फिर उन्हें स्थानीय बाजार में ही औने पौने दामों में बेचना पड़ता है। इसके चलते जनपद के किसानों को नई फसलों से मोहभंग भी होता जा रहा है। इधर, अब आधुनिक और नई फसलों की खेती करने वाले किसानों को फसल बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। जनपद में 2000 से अधिक जन सुविधा केंद्रों पर ई-मार्ट की सुविधा शुरू की गई है। ई-मार्ट पर पंजीकरण कराने वाले घर बैठे ही अपनी फसल को देश के किसी भी कोने में बेच सकेंगे। खास बात यह है कि उन्हें इस फसल का वाजिब दाम भी मिल सकेगा। इसको लेकर किसानों ने जन सुविधा केंद्रों पर अपना पंजीकरण कराना भी शुरू कर दिया है।
ई-मार्ट के जरिए इस तरह होगी बिक्री
किसान को जन सुविधा केंद्र जाकर ई-मार्ट पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। यह पंजीकरण निशुल्क होगा। पोर्टल पर किसानों को कौन सी फसल और उसकी मात्रा की जानकारी भी दर्ज करानी होगी। इसके बाद पोर्टल से जुड़ी कंपनियां और खरीदार संबंधित फसल की बोली लगाएंगे। जिस बोलीदाता कंपनी के नाम पर बोली छूटेगी, उसका प्रतिनिधि मौके पर जाकर संबंधित किसान की फसल को देखकर उसकी खरीदारी करेगा। खास बात यह है कि फसल उठाने से पहले ही किसान को फसल का शत-प्रतिशत भुगतान उसके खाते में जमा कर दिया जाएगा। इससे किसान की घर बैठे ही फसल की बिक्री तो होगी ही, साथ ही उसके स्थानीय बाजार रेट से अधिक मुनाफा होगा।
पंजीकरण के लिए इन कागजात की होगी जरूरत
जन सुविधा केंद्र पर किसानों को पंजीकरण के लिए पहचान के लिए पैन कार्ड, वोटर कार्ड, एड्रेस के लिए विद्युत बिल/ ड्राइविंग लाइसेंस/बैंक पासबुक देने होंगे। जन सुविधा केंद्र संचालक इन कागजातों को किसान के पंजीकरण फॉर्म पर अपलोड करेंगे।
मैंने पूर्व में काला गेहूं, काला धान समेत कुछ नई फसलें पैदा की थीं, मगर बिक्री के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। मजबूरन स्थानीय मार्केट में ही औने पौने दामों में बेचना पड़ा। उम्मीद है ई-मार्ट से काफी फायदा मिलेगा। बिक्री की समस्या हल हो जाएगी तो नई प्रजातियों की फसलें पैदा करने मे कोई दिक्कत नहीं होगी। - गुरमंगत सिंह, किसान, सिमरिया ताल्लुके महाराजपुर
मैंने इस वर्ष उन्नत प्रजाति का तरबूज और खरबूजे की फसल लगाई थी। फसल भी अच्छी हुई। मगर लोकल मार्केट में व्यापारी कम दाम दे रहे थे। जिससे लागत निकलना भी मुश्किल था। फसल बाहर ले जाकर बेचने को सोचा, मगर तमाम अड़चनें आईं। खराब होने के डर से थक हारकर लोकल मार्केट में ही फसल बेचनी पड़ी। - बलकार सिंह, किसान, खांडेपुर
जन सुविधा केंद्रों के माध्यम से ई-मार्ट सुविधा शुरू की गई है। यह सुविधा किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, उन्हें फसल बिक्री के लिए इधर-उधर भटकना नहीं होगा और फसल की पूरी धनराशि भी खरीद के दौरान ही किसान को मिल जाएगी। अब तक जनपद में 500 से अधिक किसान पंजीकरण का चुके हैं। - शुभम सिद्धार्थ, जिला प्रबंधक, सीएससी