सफेदपोशों और ठेकेदारों के गठबंधन से चल रहे रॉयल्टी चोरी के खेल में टांग अड़ाना न केवल डीएफओ को महंगा पड़ गया बल्कि डिप्टी रेंजर को भी सस्पेंड होकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। शासन ने एक दिन पहले डीएफओ को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया था। शुक्रवार को डिप्टी रेंजर को भी सस्पेंड कर दिया गया
मालूम हो कि 28 अगस्त की रात माला रेंज के डिप्टी रेंजर वजीर हसन ने पत्थर लदे ट्रक को रोक लिया था और अभिलेख न मिलने पर चालक को रेंज कार्यालय ले जाकर पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद मामला ठीक मिलने पर उसे छोड़ दिया गया। ट्रक चालक ने इसकी सूचना अपने मालिक को दी। उसने सत्ता में अपनी पहुंच के बल पर डीएफओ को जाइका के परियोजना निदेशालय से संबद्ध करा दिया। हैैरानी की बात यह है कि 28 से एक सितंबर तक डीएफओ जिले से बाहर थे। इसके बावजूद उन्हें हटा दिया गया।
शुक्रवार को शासन के निर्देश पर वन संरक्षक वीके चोपड़ा ने डिप्टी रेंजर वजीर हसन को ट्रक चालक को रोककर उससे अभद्रता करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया। जंगल से गुजर रहे ट्रक को रोककर चेकिंग करने पर दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से विभाग में हड़कंप है। वन कर्मियों का कहना है कि यदि सत्ता के दबाव में इस तरह कार्रवाई होगी तो मनोबल टूटेगा और काम करने में दिक्कत आएगी।