अन्नदाता पर आफत
क्रय केंद्रों पर तमाम दिक्कतें झेलकर जैसे-तैसे बिक पाया था धान, अब भुगतान को काटने पड़ रहे चक्कर
एक अक्तूबर से शुरू हुई थी खरीद, 34 हजार किसानों से खरीदा जा चुका है 20.88 लाख क्विंटल धान
पीलीभीत। धान खरीद को पारदर्शिता से संपन्न कराने के शासन-प्रशासन की सख्ती के बीच भले ही बिचौलियों पर कुछ शिकंजा कसा गया हो, लेकिन किसान की मुश्किल कम नहीं हो सकी है। अब भी किसान मंडियों में क्रय केंद्रों पर धान तुलवाने के लिए जूझ रहे हैं। वहीं जिन किसानों के धान की खरीद हो चुकी है। वह भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे हैं। जनपद भर के करीब चार हजार किसानों का 100 करोड़ का भुगतान अभी अटका हुआ है। इससे घरेलू कामकाज से लेकर आगे खेती के लिए आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा। अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
जनपद में एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू की गई थी। पहले डेढ़ सौ से अधिक सेंटर थे। मगर शासन-प्रशासन ने हर साल की तरह चलने वाली गड़बड़ी पर निगाहें तरेरी तो इसका असर भी दिखाई देने लगा था। कई एजेंसियां सरेंडर कर गई थीं। किसी ने खुद के सामने आ रही आर्थिक दिक्कत को वजह बताया, तो कोई संसाधनों की कमी बताकर पीछे हट गया था। फिलहाल 115 सेंटरों पर अभी धान खरीद चल चल रही है, जोकि 31 जनवरी तक होगी। अब तक 55500 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। इसमें से 34 हजार किसानों से धान खरीदा जा चुका है। करीब 20,88,064 क्विंटल (बीस लाख अठासी हजार चौसठ) धान क्रय केंद्रों पर खरीदा जा चुका है। शुरुआत में नमी की दिक्कत बताकर धान लौटाया जाता रहा। फिर बिचौलियों और क्रय केंद्र प्रभारियों के बीच चल रही साठगांठ ने असर डाला। नतीजतन न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने के लिए क्रय केंद्रों पर जैसे-तैसे किसान धान बेच सके थे। उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनकी फसल का वाजिब दाम मिलेगा। मगर यह कीमत कब मिलेगी, अब किसान इसे लेकर ज्यादा परेशान हैं।
चार हजार किसानों का 100 करोड़ का भुगतान लंबित है। इसे अभी किसानों को नहीं दिया जा सका है। किसान के सामने नई फसल करने तो किसी किसान के घर शादी-बरात या अन्य कामकाज होने हैं। कोई फसल के लिए पूर्व में ली गई उधारी चुकाने के लिए भुगतान का इंतजार कर रहा है। अधिकारियों को शिकायतें भेजी गई, दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी अभी कोई राहत नहीं मिल सकी है।
नेफेड और यूपीएसएस केंद्रों पर बेचने वाले अधिक
धान खरीद की शुरुआत में जिले में नेेफेड के 15 और यूपीएसएस के 32 क्रय केंद्र लगाए गए थे। इन पर किसानों ने अपना धान बेचा था। मगर बीच में ही दोनों एजेंसियां धान खरीद से बाहर हो गईं। इनके क्रय केंद्र बंद कर दिए गए। एजेंसियों ने भी सरेंडर करने के दौरान आर्थिक दिक्कत का हवाला दिया था। मगर चर्चा सख्ती के चलते खेल न हो पाने की रही थी। अब भुगतान में पेंच फंसने पर भी इन्हीं केंद्रों के किसान अधिक बताए जा रहे हैं।
उतार की धीमी रफ्तार बन रही वजह
धान खरीद से जुड़े अफसरों की मानें तो किसानों का भुगतान चावल की उतार के बाद एफसीआई से हुए भुगतान से किया जाता है। इस बार भुगतान की गति धीमी है। धान का उठान भी क्रय केंद्रों पर समय से नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से जब पेमेंट मिलने में देरी हो रही तो सीधा असर किसान के भुगतान पर पड़ रहा है। यह सबसे अहम वजह बताई जा रही है।
कार्रवाई तो खूब हुई, मगर
कुछ अफसरों ने लगाई सेंध
प्रशासन की ओर से इस बार सख्ती बरती गई। क्रय केंद्र प्रभारियों से लेकर बिचौलियों तक को रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा गया। दैनिक लक्ष्य पूरा न करने पर भी क्रय केंद्र प्रभारियों को शांतिभंग की आशंका में चालान किया। अफसरों की जिम्मेदारी तय की गई। मगर इस सख्ती के बीच कुछ अफसरों ने व्यवस्था को गड़बड़ा दिया और शासन-प्रशासन की मंशा को सफल होने में भी ग्रहण लगा गए है। अभी भी कई धान क्रय केंद्रों पर इसकी हकीकत देखी जा सकती है।
लेखपालों को लगाया, मगर
जिम्मेदारी नहीं निभाई गई
क्रय केंद्रों पर किसानों को कोई दिक्कत न आए, इसके लिए लेखपालों को ड्यूटी पर लगाया गया। छोटे किसानों के धान को क्रय केंद्र पर बिकवाने तक की जिम्मेदारी दी गई। मगर कुछ लेखपालों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश स्थानों पर लापरवाही चरम पर रही। लेखपाल खुद मनमानी पर उतारू दिखाई दिए। कई केंद्रों पर तो उनकी पूर्व में मौजूदगी ही नहीं दिखी। कुछ जगह दिखे भी तो उनके सामने चल रही गड़बड़ी को नजर अंदाज करते रहे या हिस्सा बन गए। अधिकारियों तक भी इसकी शिकायतें पहुंची थीं।
नौ को है भाई की शादी
22 अक्तूबर को तीन खातों में करीब 98 क्विंटल धान नेफेड के क्रय केंद्र पर बेचा था। इसका भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। नौ दिसंबर को भाई अशोक कुमार की शादी होनी है। धान के भुगतान को चक्कर लगा रहे हैं।
- राकेश कुमार, किसान जमुनिया खास
सभी काम प्रभावित हो रहे हैं
मैने 62 क्विंटल धान एक महीना पहले नेफेड के क्रय केंद्र पर बेचा था। अभी तक भुगतान नहीं हो सका है। भुगतान के लिए चक्कर लगा रहे हैं। गेहूं की बुवभाई भी प्रभावित हो रही है। इसके घरेलू खर्च पर भी असर पड़ा है।
- रामकुमार मिश्रा, किसान करेली
उधारी चुकता किए बिना
कैसे मिलेगा आगे सामान
चार से पांच बार चक्कर लगाने के बाद नेफेड के सेंटर पर 210 क्विंटल धान बेचा था। अब भुगतान नहीं हो सका है। इसके लिए भी चक्कर लगा रहे हैं। न उधारी चुकता हुई, न ही नई फसल को काम आगे बढ़ पा रहा।
- सुमित मौर्य- किसान करेली
किसानों का भुुगतान कराया जा रहा है। नेफेड और यूपीएसएस के केंद्र बंद हो गए थे। उनका भुगतान अधिक बकाया है। इसके अलावा चावल उतार की धीमी गति से असर पड़ा है। कुछ किसान समस्या लेकर आए थे तो उनका जल्द भुगतान कराने का भी प्रयास किया गया है।
- डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ