अखिल
भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने मूक बधिर महिला से बलात्कार की
घटना को झूठा बताने के विरोध में पीड़िता के साथ पुलिस के खिलाफ जुलूस
निकाला और एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने हल्का
दरोगा को बर्खास्त करने सहित छह सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है।
एपवा
पदाधिकारियों ने कहा कि कोतवाली क्षेत्र की एक मूकबधिर महिला का छह मार्च
को घर से अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया गया। पहले पुलिस घटना के अगले दिन
रिपोर्ट दर्ज की। आरोप है कि अपराध कम कम होना दर्शाने के लिए स्थानीय
पुलिस शुरू से ही घटना को दबाने में जुटी रही। अब मेडिकल रिपोर्ट का हवाला
देकर पुलिस घटना को गलत साबित करने पर तुली है।
प्रदर्शनकारियों ने
पुलिस के खिलाफ नगर में जुलूस निकालकर एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना दिया।
धरना स्थल पर हुई सभा में जिला पंचायत सदस्य और ऐपवा की जिला सचिव रमा
गैरोला ने कहा कि सपा सरकार में बलात्कार की घटनाओं की बाढ़ आई हुई है। इसे
कम दर्शाने को पर्दा डाला जा रहा है।
उन्होंने हल्का दरोगा व उनके
सिपाहियों पर सबूतों को मिटाने के साथ दहशत फैलाने का आरोप लगाते हुए
उन्हें बर्खास्त कर मुकदमा दर्ज करने, पीड़िता को दस लाख मुआवजा दिलाने और
आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
सभा
में अखिल भारतीय किसान महासभा के वरिष्ठ नेता अलाउद्दीन शास्त्री ने कहा
कि जघन्य अपराध को फर्जी बताकर केश को समाप्त करने का प्रयास हो रहा है।
आखिर महिलाएं कैसे सुरक्षित रहेंगी? प्रदर्शनकारियों ने छह सूत्रीय ज्ञापन
एसडीएम को सौंपा।
प्रदर्शन करने वालों में ऐपवा की सह सचिव रामकांती, खेत
मजदूर सभा के देवीदयाल, आइसा के जिला संयोजक धर्मेंद्र कुमार, हाजरा बानो,
नसीम, छुन्नू खां, मंसूर, वसीउल्ला आदि थे।