पीलीभीत। खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का धंधा पहले ही लंबे समय से चल रहा है। शासन-प्रशासन की ओर से मिलावट पर शिकंजा कसने के तमाम दावे धरातल पर पहुंचने से पहले ही धराशायी हो जाते हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने नया फूड सेफ्टी कानून लागू किया है, जिसमें दुकानदारों को मिठाई की एक्सपायरी डेट भी लिखनी होगी, लेकिन अभी चंद दुकानदारों को छोड़कर कोई भी न तो ऐसा कर रहा है न ही इस नियम को लेकर गंभीर है। कुछ व्यापारी ग्राहकों से खराब मिठाई खरीदने के समय होने वाली झड़प से बचने के लिहाज से यह कानून फायदेमंद बता रहे हैं तो अधिकतर इसे अव्यवहारिक मानते हैं। फिलहाल मिलावट का खेल रोकना आसान लग रहा। इतना तो तय है कि दुकानदार एक्सपायरी डेट नहीं बताएंगे और ग्राहक पहले की तरह ही सही हो या खराब मिठाई घर लेकर जाएंगे।
जनपद में मिठाई की छोटी और बड़ी मिलाकर एक हजार से अधिक दुकानें हैं, इनमें से अधिकतर तो पंजीकृत भी नहीं है। 80 फीसदी से ज्यादा दुकानों में बनने वाली मिठाई की गुणवत्ता पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। तमाम दुकानों पर बिकने वाली मिठाई ज्यादातर मिलावटी होती है। मिठाई बनाने वाली जगह पर भी गंदगी रहती है। चंद नामचीन दुकानों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश मिठाई काउंटर पर सजाकर रखते वक्त भले ही ताजी और लजीज दिखाई दें, लेकिन हकीकत में वह दो से चार या पांच दिन पुरानी होती है। अधिकांश मिठाइयों में खट्टापन भी आ चुका होता है, मगर दुकानदार तमाम तरह के केमिकल मिलाकर न बिकने तक मिठाइयों के खट्टेपन को नजरंदाज करते रहते हैं। तमाम ग्राहकों की खराब मिठाई खरीदने के बाद दुकानदारों से नोकझोंक भी होती है, लेकिन दुकानदार कभी भी खुद की गलती मानते नहीं। उल्टे वह ग्राहक से अभद्रता करने पर उतारू हो जाते हैं। तीन से पांच दिन की रखी मिठाई सेहत को भी नुकसान पहुंचाती है। अधिकांश दुकानदारों का स्वयं मानना है कि कुछ मिठाइयां जैसे कि लौज 24 घंटे में खराब होने लगती है। स्पंज रसगुल्ला और गुलाब जामुन भी 48 घंटे के अंदर खराब होने लगता है। नए फूूड सेफ्टी कानून के तहत अब मिष्ठान विक्रेताओं पर शिकंजा कसा गया है। दुकानदार को बिक्री के लिए काउंटर पर रखी गई मिठाई के बारे में जानकारी भी चस्पा करनी होगी। कौन सी मिठाई कब बनाई गई, कब तक उसे बेचा जा सकता है ताकि ग्राहकों तक खराब मिठाई न पहुंचे। मिठाई की दुकानों पर इस नियम का पालन फिलहाल नहीं हो रहा। हालांकि एफएसडीए टीम इस मुद्दे पर जल्द ही बैठक करने की बात कह रही है।
मिलावट करने वाला क्यों देगा सही जानकारी
एक मिष्ठान विक्रेता का कहना है कि नए नियम को लेकर सबसे बड़ा सवाल है कि मिठाई की एक्सपायरी डेट की पर्ची ट्रे या फिर काउंटर पर दुकानदार को ही लिखनी होगी। अगर कोई दुकानदार मिलावट करके या फिर बासी मिठाई बेचने का प्रयास करेेगा तो वह सही जानकारी क्यों लिखेगा, उसकी ओर से दुकान के काउंटर पर लिखी गई एक्सपायरी डेट कितनी भरोसेमंद है, इसका पता लगाने का कोई उपाय नहीं है। दुकानदार अपनी मनमर्जी से एक्सपायरी डेट बताता रहेगा। ग्राहक खराब मिठाई खरीदते रहेंगे।
दो से चार दिन तक ही चल पाती है मिठाई
मिठाई की एक्सपायरी डेट की बात करें तो प्रत्येक मिठाई की खराब होने की अलग समय सीमा है। छेना से बनी मिठाई 24 घंटे तक और मावा से बनी मिठाई 48 घंटे तक खाने योग्य रहती है। घी और बेसन से बनी मिठाइयां भी दो से तीन दिन तक ही खाई जा सकती हैं। यह समय सीमा भी तब है, जब दुकानों पर मिठाई रखने के संसाधन हों। अधिकांश दुकानदार केमिकल का प्रयोग करके मिठाई कई दिन तक सुरक्षित रखते हैं।
नामचीन दुकानों पर भी है अव्यवस्था
एक साल पूर्व तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पुनिया ने मिलावटखोरी पर अभियान चलाकर कार्रवाई की थी। जनपद भर की दुकानों को चेक किया गया था। अधिकांश दुकानों में मिठाई बनाने के स्थान पर गंदगी मिली थी। पीलीभीत में रेलवे स्टेशन रोड, कचहरी रोड, शहर के अंदर और बीसलपुर की नामचीन मिठाई की तीन दुकानों में तो मिठाई में चीटे और कीड़े पड़े मिले थे। उन दुकानों को सील कर लाइसेंस तक निरस्त कर दिए थे।
दुकानदार बोले- ऐसा कर पाना व्यवहारिक नहीं
जिस तरह से नए नियम हैं कि हर मिठाई की एक्सपायरी डेट दुकान पर रखनी होगी। कहीं से भी व्यवहारिक नहीं है। दुकान पर दर्जनों क्रेटों में मिठाई रहती है। प्रतिदिन फिर इसकी एक्सपायरी डेट की चिट ही बदली जाती रहेगी। यह सब आसान नहीं होगा। नया आदेश स्थगित होने की बात सुनने में आई थी। - सुमित गुप्ता, मिठाई व्यापारी
बेवजह की झड़प से बच जाएंगे
कई बार ऐसा होता था कि ग्राहक मिठाई ले जाने के कई दिन बाद आकर शिकायत करने लगता था कि खराब निकली। जब मिठाई की एक्सपायरी डेट लिखी रहेगी तो वह खुद ही सोचेगा। हमारे यहां प्रत्येक मिठाई पर चिट लगाना शुरू करा दिया गया है। कम से कम इस तरह के केस में तो राहत मिलेगी। - पारस गुप्ता, मिठाई व्यापारी
शासन से नया आदेश प्राप्त हुआ है। मिठाई कब बनी हैं, इसे व्यापारी स्वेछा से लिखेगा, मगर उसे यह जरूर लिखना होगा कि मिठाई कब तक खाने लायक है। इस नियम का सख्ती से पालन भी कराया जाएगा। दुुकानदारों को नियम की जानकारी देने के लिए जल्द बैठक की जाएगी। मिलावटखोरी पकड़ने के लिए मिठाई या अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए जाएंगे। - शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए