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Pilibhit News: नेपाली हाथियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कार्ययोजना तैयार

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जान-माल और फसलों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ आज से देंगे प्रशिक्षण
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पीलीभीत। तराई के जंगलों से सटे इलाकों में नेपाली हाथियों की लगातार बढ़ती सक्रियता और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने ठोस पहल की है। जान-माल और फसलों की सुरक्षा के लिए अब विशेषज्ञों की मदद से वनकर्मियों और ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये लोग टीम बनाकर निगरानी करेंगे।
जिले के जंगलों और उससे सटे ग्रामीण क्षेत्रों में नेपाली हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। पिछले कई महीनों से हाथी जंगल से बाहर निकलकर खेतों और आबादी वाले इलाकों में नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग की निगरानी के बावजूद हाथियों को नियंत्रित करने में कठिनाई आ रही है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए एक निर्णायक कार्ययोजना तैयार की है। डीएफओ भरत कुमार डीके के नेतृत्व में शुक्रवार से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सहयोग से आयोजित होगी।
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प्रशिक्षण की खास बात यह है कि कतर्नियाघाट के प्रसिद्ध हाथी विशेषज्ञ दबीर हसन मुख्य प्रशिक्षक के रूप में शामिल होंगे। वे अपने दशकों के अनुभव के आधार पर हाथियों के व्यवहार, उनके मार्ग और संघर्ष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देंगे। विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि कार्यशाला में हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाए खेतों और गांवों से दूर रखने के पारंपरिक व आधुनिक उपायों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है।
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मरौली ब्लॉक सभागार में कार्यशाल सुबह 11 बजे से शुरू होगा : पहले दिन मरौरी ब्लॉक के सभागार में शुक्रवार सुबह 11 बजे से कार्यशाला आयोजित की जाएगी। दूसरे दिन गोमती उद्गम स्थल स्थित सभागार में विशेषज्ञों और स्थानीय समुदाय के बीच संवादात्मक कार्यशाला होगी। कार्यशाला में पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व, ऊर्जा निगम समेत अन्य विभागों के अफसर भी मौजूद रहेंगे। संवाद
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