पूरनपुर। हजारा थाना क्षेत्र में पिछले कई दिनों से गांवों के समीप चहलकदमी कर रहे बाघ ने गन्ना की छिलाई कर रहे गांव कबीरगंज निवासी सूरज (30) पर हमला कर लहूलुहान कर दिया। बाघ के हमला पर गन्ना छील रहे मजदूरों में भगदड़ मच गई। शोर-शराबा पर बाघ सूरज को छोड़कर फिर गन्ना के खेत में घुस गया। घायल सूचना को इलाज के लिए पलिया ले जाया गया है।
गांव कबीरगंज निवासी सूरज अपने अन्य साथियों के साथ गांव के समीप आजादनगर में सुतिया नाला के समीप अपने गन्ना के खेत में गन्ना की छिलाई कर रहा था। इस दौरान खेत से निकले बाघ ने सूरज पर हमला कर कर घायल कर दिया। सूरज के पीठ और कमर में बाघ के पंझे लगे। घटना पर गन्ना छील रहे मजदूरों में भगदड़ मच गई। बाद में मजदूरों के शोर-शराबा पर बाघ सूरज को छोड़कर फिर गन्ना के खेत में घुस गया। सूचना पर संपूर्णानगर रेंजर अनिल कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि बाघ की चहलकदमी पर आसपास के लोगों को सतर्क रहने को कहा गया। बाघ की निगरानी को टीम लगाई गई है। घायल सूरज को इलाज के लिए लखीमपुर के पलिया सीएचसी भिजवाया गया है।
बाघ, तेंदुओं की लगातार चहलकदमी से बिगड़ सकते हैं मानव-वन्यजीव संघर्ष के हालात
- पूरनपुर, मझोला और नौजल्हा क्षेत्र में देखी जा रही बाघ की चहलकदमी
- निगरानी के नाम पर औपचारिकताएं निभाने में जुटा विभाग, लखीमपुर की घटना के बाद भी नहीं गंभीर नहीं हुए अफसर
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। पीटीआर के जंगल से सटे कई ऐसे इलाके हैं जहां लंबे समय से बाघ और तेंदुए की चहलकदमी बनी हुई है। विभाग निगरानी के नाम पर औपचारिकताएं निभा रहा है। इससे मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन रही है। लखीमपुर में मंगलवार रात दो इंसानों पर हमले के बाद गुस्साए ग्रामीणों के बाघ को घेराकर मारने की घटना के बाद भी पीटीआर के अफसर गंभीर नहीं हो सके हैं।
पीटीआर में बाघों की संख्या बेहतर है। इसके चलते जंगल से सटे इलाकों में भी बाघ की चहलकदमी बनी रहती है। जंगल से सटे करीब 70 गांवों ऐसे हैं जहां बाघ की चहलकदमी होती है। पूर्व में मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाएं भी होती रहीं। दो माह पूर्व से घटनाओं को रोकने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए गए।
बाघ एक्सप्रेस वाहन के जरिए इन गांवों में कार्यक्रम कराकर लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया, लेकिन कई ऐसे इलाके हैं जहां बाघ की लगातार मौजूदगी के बाद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। इसमें पूरनपुर क्षेत्र के हजारा क्षेत्र शामिल है। इस क्षेत्र के कई गांवों में बाघ और तेंदुए की चहलकदमी देखी जा रही है।
पूर्व में एक तेंदुए की मौत भी हो चुकी है। दो जनपदों की सीमा होने के चलते निगरानी में लापरवाही का मामला भी सामने आ रहा है। इसके अलावा न्यूरिया क्षेत्र के कई ऐसे गांव हैं जहां एक माह पूर्व से बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। कई पशुओं को भी बाघ ने मार डाला। माधोटांडा क्षेत्र के नौजल्हा क्षेत्र में पांच दिन पूर्व से बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की ओर से निगरानी के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि जंगल से बाहर वन्यजीवों की मौजूदगी पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।