पीलीभीत। नगर पालिका के विकास कार्यों में लगे घोटाले के आरोपों की जांच चार सदस्यीय समिति करेगी। समिति का गठन गन्ना राज्यमंत्री के प्रतिनिधि की शिकायत पर डीएम संजय कुमार सिंह ने किया है।
सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को आरोपों के भौतिक, तकनीकि और अभिलेखों की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार के प्रतिनिधि राकेश सिंह ने डीएम को शिकायती पत्र दिया था। इसमें नगर पालिका की ओर से ग्रीन ट्रीटमेंट बायो रेमीडेशन के 2.53 करोड़ से अधिक की लागत के रखे प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे।
कहा कि कार्य की मजबूती, अवधि और लाभ आदि को लेकर पूर्व में कोई सर्वे भी नहीं कराया गया। इसके अलावा पिछले साल बिजली खंभों और लाइटें लगाने के नाम पर करीब 2.50 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया। दीवाली पर भी लाइटों के प्रस्ताव बने, लेकिन शहर में हर ओर अंधेरा है। इस मामले की जांच कराई जाए। अब दोबारा लाइट लगवाने का प्रस्ताव कर दिया गया। उन्होंने पालिका चेयरमैन के पति पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
कहा कि चेयरमैन पति कार्यालय में बैठकर कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करते हैं। कार्यों में इनका दखल रहता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने कमेटी का गठन किया। सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
जांच में टीम में सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा अधिशासी अभियंता लोक निर्माण, अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग व अधिशासी अभियंता जल निगम को शामिल किया है।
पालिका चेयरमैन के भाई करा रहे निर्माण कार्य : राज्यमंत्री के प्रतिनिधि ने शहर के नेहरू पार्क में हो रहे सुंदरीकरण कार्य के ठेके पर भी सवाल उठाए। कहा कि ठेका किसी पलक अग्रवाल फर्म के नाम है। काम चेयरमैन के भाई करा रहे हैं, जबकि जनप्रतिनिधि का रिश्तेदार ठेकेदारी नहीं कर सकता। कार्यों में मानक की अनदेखी के भी आरोप लगाए। पालिका के डीजल व्यय समेत अन्य बिंदुओं पर भी सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी। पत्र में कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं।