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Pilibhit News: तराई में मानव-तेंदुआ संघर्ष पर होगा व्यापक अध्ययन

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पीटीआर से सटे क्षेत्रों में तेंदुओं की बढ़ती घटनाओं के बीच आठ प्रमुख बिंदुओं पर सर्वे कराने की तैयारी, सेव इन्वायरमेंट सोसायटी के पत्र का विभागीय अधिकारियों ने लिया संज्ञान
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पीलीभीत। पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) और उससे सटे तराई क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए अब गंभीर पहल शुरू हो गई है। स्थानीय पर्यावरण चिंतक एवं इको एक्टिविस्ट की ओर से उठाए गए मुद्दे का वन विभाग ने संज्ञान लेते हुए विस्तृत सर्वे और अध्ययन कराने की प्रक्रिया शुरू की है। वन एवं वन्यजीव प्रभाग की ओर से तराई क्षेत्र में तेंदुओं की गतिविधियों, संघर्ष के कारणों और समाधान को लेकर व्यापक अध्ययन कराने की तैयारी की जा रही है।
जिले में पिछले कई माह से जंगल से बाहर तेंदुए की सक्रियता बढ़ी है। कई बार घरों के नजदीक तक तेंदुए पहुंचे। हाल ही में गजरौला क्षेत्र में ग्रामीणों पर हमले के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने तेंदुए को पकड़कर उसके पैरों को बांध दिया था। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सेव इन्वायरमेंट सोसायटी पीलीभीत के सचिव एवं स्थानीय पर्यावरण चिंतक टीएच खान ने प्रभागीय निदेशक वन एवं वन्यजीव प्रभाग को पत्र भेजकर तराई क्षेत्र में बढ़ते मानव-तेंदुआ संघर्ष पर चिंता जताई थी।
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पत्र में कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उससे लगे ग्रामीण एवं उपनगरीय क्षेत्रों में तेंदुओं की मौजूदगी लगातार लोगों के लिए भय का कारण बन रही है। खेतों, गांवों और आबादी के पास तेंदुओं की आमद से आमजन के साथ-साथ वन विभाग के कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मांग की गई कि इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिक तरीके से सर्वे और अध्ययन कराया जाए। इसके तहत तेंदुओं की प्रजाति, उनकी गतिविधियां, मूवमेंट, मानव-तेंदुआ संघर्ष के मुख्य कारण, प्रभावित क्षेत्रों का डेटा और संभावित समाधान बिंदुओं पर शोध कराया जाए। साथ ही यह भी सुझाव दिया कि सर्वे के दौरान यह अध्ययन हो कि आखिर तेंदुए इंसानी आबादी की ओर क्यों बढ़ रहे हैं। विभाग ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए मामले को फील्ड डायरेक्टर को अवगत कराया। उन्होंने संस्तुति दे दी। संवाद

आसपास जनपदों में भी अध्ययन की बताई जरूरत
पत्र में यह भी कहा कि तराई के आसपास बसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-तेंदुआ संघर्ष लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में लखीमपुर, बहराइच, पीलीभीत, बरेली, रामपुर, बिजनौर समेत उत्तराखंड सीमा से जुड़े तराई क्षेत्रों में अध्ययन कराने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अधिकारियों की ओर से मामले में सकारात्मक रुख अपनाया है।

आठ प्रमुख बिंदु पर किया जाएगा अध्ययन
अध्ययन के लिए आठ प्रमुख बिंदु तय किए हैं। इनमें तेंदुओं की प्रजाति और उनके वितरण क्षेत्र, गतिविधियों का पैटर्न, फील्ड सर्वे डेटा संग्रहण, संघर्ष के कारण, केस स्टडी, इंसानों और तेंदुओं के सह-अस्तित्व की संभावनाएं और निष्कर्ष एवं सुझाव शामिल हैं।

पीटीआर में 100 से अधिक तेंदुए, जंगल से बाहर मिलते रहे शव
73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 100 से अधिक तेंदुए पाए जाते हैं। वहीं, जंगल में बाघों की संख्या भी अधिक है। ऐसे में बाघों से बचकर तेंदुए भी सुरक्षित ठिकाना तलाशते हैं। जंगल से बाहर भी इनकी सक्रियता बढ़ जाती है। जिले में पिछले एक साल में तेंदुए की जंगल से बाहर सक्रियता बढ़ी। बरखेड़ा में दो तेंदुए के शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा जंगल मार्गों पर भी तेंदुए की वाहनों की चपेट में आकर मौत की घटनाएं सामने आती रहीं। इसके अलावा शहर से सटे इलाके तक तेंदुए की चहलकदमी बढ़ी। वर्तमान में भी गजरौला के दियोरा और शहर से सटे इलाके में तेंदुए की चहलकदमी देखी जा रही है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए पूर्व से ही प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों को जागरूक करने पर अधिक जोर है। जंगल से सटे गांवों में बाघ एक्सप्रेस वाहन के जरिए नियमित जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। अब तेंदुओं को लेकर सेव इन्वायरमेंट सोसायटी के माध्यम से एक अध्ययन भी कराया जा रहा है, जिससे वास्तविक कारण और निवारण की अहम जानकारी मिल सके।
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- भरत कुमार डीके, डीएफओ, वन एवं वन्यजीव प्रभाग
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