हजारा (पीलीभीत)। शारदा का जलस्तर बढ़ने से कई मार्गों के ऊपर तेज बहाव के कारण आवागमन ठप हो गया है। कबीरगंज के पास सड़क पर नाव चलने लगी है। जरूरत मंद लोग नाव का सहारा ले रहे हैं। उधर राणा प्रतापनगर और बैलहा में भू-कटान से करीब 40 एकड़ भूमि शारदा नदी में समा गई है। पहाड़ाें पर हो रही बारिश के अतिरिक्त वनबसा बैराज द्वारा रिलीज किए गए पानी से शारदा नदी उफना गई जिससे सिद्ध नगर, भुरजुनियां, चंदनगर, नेहरूनगर मार्गों के ऊपर तेज बहाव होने लगा है तथा मुरैनिया-अशोकनगर जाने वाले मार्ग पर अधिक पानी के चलते जरूरत मंद लोग नाव से आवागमन करने लगे हैं। इतना ही नही निचले भाग का सैकड़ों एकड़ गन्ने की फ सल जलमग्न हो गई है।
उधर, राणा प्रतापनगर में शारदा नदी ने एक बार टर्न होकर परवेज खान, सलीम, आयुब, रहीसा बी, मोसिन, वंशीधर तथा बैलह में मक्खन सिंह, कश्मीर सिंह, गुर दयाल सिंह, रंजीत सिंह, अर्जुन सिंंह, सुंदर सिंह आदि किसानों की करीब 40 एकड़ गन्ना सहित फसल शारदा में समा गई है। इसके अतिरिक्त संपूर्णानगर खीरी वन रेंज के हजारा और कबीरगंज के करोड़ों की वन संपदा का वजूद मिट गया है। भू-कटान की खबर पर लेखपाल रामचंदर, लुकमान ने मौके पर पहुंच कर हालात देखे और बताया शारदा का जलस्तर शाम को घटने लगा है।
शारदा नदी में बहकर आई कीमती लकड़ी
माधोटांडा। पहाड़ों से शारदा में पहली बार बड़े पैमाने पर बहकर आए विशाल साल, चीड़ सहित विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों की लकड़ी काटकर ले जाने को एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और मजदूर नदी किनारे पहुंच गए। जलस्तर बढ़ने से लकड़ी ढुलान नहीं हो सका। सूचना पर सामाजिक वानिकी के वन दरोगा मोहम्मद अयूब भी पहुंचे। इधर, इस बाबत रेंजर वेदराम ने बताया कि शारदा नदी किनारे वनकर्मियों को लगाकर बहकर आई लकड़ी को स्टाक कराया जा रहा है। इसी कारण ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मंगवाई हैं। लकड़ी स्टाक होने के बाद वन निगम को दे दी जाएगी या नीलाम की जाएगी। यह आला अफसरों के निर्देश के बाद तय होगा।
बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर ग्रहण
माधोटांडा। शारदा का जलस्तर बढ़ने से कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। इधर, गभिया सहराई क्षेत्र में बोरों में मिट्टी भरकर डालने की तैयारी की गई, लेकिन जलस्तर बढ़ने से कटर बनाने का कार्य रुक गया। इससे बाढ़ नियंत्रण के कार्यों पर ग्रहण लग गया है।