पूरनपुर/ हजारा। हरीपुर रेंज के जंगल में पिछले साल मारे गए बाघों के फरार दो हत्यारोपियों को एसटीएफ ने धर दबोचा। एसटीएफ टीम ने दोनों को हजार पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया, जहां से दोनों का चालान भेज दिया गया है।
मालूम हो कि हरीपुर के जंगल में 24 और 25 मई 2012 को एक ही स्थान पर एक फर्लांग की दूरी पर दो बाघों के शव मिले थे। इससे वन महकमेे के अफसरों में हड़कंप मच गया था। दिल्ली बाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो सहित विशेषज्ञों की तीन टीमें भी आकर जांच में जुट गई थी। मामले की जांच में थाना क्षेत्र के हिट्री शीटर श्रीनगर निवासी राधेश्याम तथा कबीरगंज के जगधर व गौढ़ी संचालक मंसूर अहमद, रमजान अली तथा पलिया (खीरी) थाना क्षेत्र के मरौचा निवासी ताबुद्दीन व मुस्ताक शाह सहित पौन दर्जन नाम प्रकाश में आए थे, जिसमें पूरनपुर कोतवाली के ढक्का चाट निवासी इकलाख व हजारा थाना क्षेत्र के नहरोसा निवासी रामकुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। तबसे वह जेल में हैं।
इधर, फरार हत्यारोपियों को वन विभाग की टीम तमाम प्रयास के बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी का जिम्मा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंपा गया था। शुक्रवार की रात पहुंचे एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक डा अरविंद चतुर्वेदी ने छापामार कर फरार बाघों के हत्यारोपी हजारा थाना के गांव नहरोसा के मुश्ताक और कबीरगंज के बादशाह को गिरफ्तार कर लिया। इसकी पुष्टि हरीपुर रेंज के रेंजर जगन्नाथ प्रसाद ने की। एसटीएफ की टीम गिरफ्तार दोनों आरोपियों को विवेचक के सुपुर्द करेंगी। मामले की विवेचना एसडीओ सुधाकर मिश्रा कर रहे हैं।
....जब एसटीएफ से भिड़ गए सपा नेता
हजारा। बाघों की हत्या के मामले में दो नामजदों के अलावा एसटीएफ कबीरगंज निवासी 16 वर्षीय सुनील कुमार व नहरोसा के फ रियाद को पकड़ कर थाने ले आई। इस पर ट्रांस क्षेत्र के सपा अध्यक्ष सुल्तान हसन गाजी अपने समर्थकों के संग थाने पहुंच गए और सपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। घटना की शिकायत सपा विधायक पीतमराम व डीजीपी से की गई। इस पर एएसपी ने हिरासत में लिए गए दोनों को परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया।
मुख्य आरोपी चकमा देकर फ रार
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार की आधी रात में एसटीएफ ने मुख्य आरोपी को सोते समय चारपाई पर पकड़ लिया था, लेकिन आरोपी अपना नाम गलत बताते हुए मेहमानी में आने की बात कही। इस पर दबिश देने गई पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पुलिस के चंगुल से छूटते ही वह भाग निकला। बाद में जब जानकारी हुई तो पुलिस ने उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं लग सका। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।