पीलीभीत। कठोर परिश्रम करके खेतों में पैदा किए गए गेहूं को बेचने के लिए अब किसानों को आंसू बहाने पड़ रहे हैं। इसकी मूल वजह यह है कि बिक्री के लिए जो खरीद केंद्र खोले गए हैं उन पर बदइंतजामी के साथ-साथ धांधली व्याप्त है। किसान शासन द्वारा निर्धारित मूल्य से कम रेट पर आढ़तियों को गेहूं बेचकर नकद भुगतान पा रहे हैं। इससे उन्हें प्रति क्विंटल 80 से 100 रुपये का नुकसान हो रहा है।
सरकार ने इस साल गेहूं का रेट 1350 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि गेहूं सेंटरों पर हो रही खरीद में बरती जा रही धांधली के कारण शायद ही किसी किसान का गेहूं इस दाम में बिका हो। मंडी की बात छोड़ दें तो अन्य क्रय केंद्रों पर केंद्र प्रभारी ही नदारद रहते हैं। सिर्फ नाम को बैनर और कांटे लगे हैं। कहीं वारदाना नहीं है तो कहीं बजट। नतीजतन किसानों को भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इधर, मंडियों का हाल यह है कि यहां सेंटरों पर खरीद न के बराबर है। वजह है किसान आढ़ती के यहां औने पौने दाम पर भी गेहूं बेचकर नगद भुगतान में पाकर खुश हो जाता है। उधर, सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को अव्यवस्थाओं के कारण भूखे-प्यासे रहकर खुले में समय काटने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। उसके बाद फिर उसे भुगतान के लिए भटकना पड़ता है।
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क्या कहते हैं किसान
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गेहूं बेचने को कई-कई दिन खाने पड़ रहे धक्के
थाना जहॉनाबाद ग्राम शाही निवासी किसान कृष्ण कुमार बताते हैं कि गेहूं बेचने के लिए कई दिन तक धक्के खाने पड़ते हैं। वह कई दिनों से 150 क्विंटल गेहूं बेचने को भटक रहे हैं। अधिकारी सख्ती कर रहे हैं, लेकिन इसका सेंटरों पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
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15 दिन बाद भी बेच नहीं पाए गेहूं
थाना कोतवाली के पुरानी पीलीभीत निवासी चंद्रपाल कहते हैं कि 15 दिन पहले गेहूं की कटाई हो चुकी है, लेकिन अब तक गेहूं की बिक्री नहीं कर पाए हैं। उनके पास करीब तीन सौ क्विंटल गेहूं है। मजबूरन औने पौने दामों पर आढ़तियों के हाथों गेहूं बेचना पड़ रहा है।
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वर्जन
सेंटरों पर बराबर निगरानी की जा रही है। सभी केंद्र प्रभारियों को किसानों को सुविधाएं देने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। इसके बाद भी जहां गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, वहां जांच कर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
राजेश उपाध्याय, डिप्टी आरएमओ।