पीलीभीत। आम आदमी की सवारी रेल का बजट मंगलवार को संसद में पेश किया गया। रेल बजट से जंक्शन और गाड़ियों के कायाकल्प की उम्मीद लगाए बैठे यात्रियों को करारा झटका लगा है। प्लेटफार्म पर बैठने से लेकर गाड़ियों में सीट पाने तक यात्रियों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। वहीं इस साल आए रेल बजट से पीलीभीत को इस बार भी कुछ नहीं मिला है। हां रेल मंत्री ने सरचार्ज के नाम पर किराया बढ़ाकर यात्रियों की कमर जरूर तोड़ दी है। अमर उजाला की टीम ने जंक्शन पर जब यात्रियों से रेल बजट पर बात की तो यात्रियों ने किराया बढ़ाने के साथ यात्री सुविधाओं को भी बढ़ाए जाने की बात कही।
हर बार की एक ही कहानी
मरौरी ब्लाक के एडीओ पंचायत रामू अवस्थी कहते हैं कि रेल बजट में पीलीभीत को कभी कुछ नहीं मिला है। मैंने तो उम्मीद करना ही छोड़ दिया है। बजट के नाम पर बस यात्री किराया बढ़ाया जा रहा है, सुविधाएं न के बराबर हैं। यात्री अभी भी ट्रेन में धक्के खाने को मजबूर हैं।
बोगी बढ़ने की थी उम्मीद
कृष्ण बिहार कॉलोनी निवासी नवजोत बताते हैं कि मुझे रेल बजट में गाड़ियों में बोगियां बढ़ाए जाने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हमारे यहां की गाड़ियों की दशा कभी नहीं बदल सकती। अगर गाड़ियों का किराया ऐसे ही बढ़ता गया तो आम आमनी के लिए सफर करना मुश्किल हो जाएगा।
सुरक्षा नाम की चीज नहीं
व्यापारी नितिन जायसवाल कहते हैं कि गाड़ियों में सफर करना असुरक्षित है। बजट में इस बार भी गाड़ियों में सुरक्षा को लेकर कुछ नहीं है। गाड़ी में सफर के दौरान कोई घटना हो जाने पर यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं बढ़ती भीड़ से असुरक्षा बढ़ती जा रही है।
समय से नहीं पहुंचती ट्रेनें
मानवाधिकार कार्यकर्ता कलीम अतहर बताते हैं कि ट्रेन में चेन पुलिंग की समस्या विकराल होती जा रही है, जिसका जहां मन आता है वो चेन खींचकर वहीं गाड़ी रोक लेता है। चेन पुलिंग के चलते गाड़ियां अपने निर्धारित समय से घंटों लेट होती हैं, साथ ही और ट्रेनों पर भी असर पड़ता है।
उपेक्षित बजट से महिलाओं में रोष
सफर में लगता है डर
मुझे तो गाड़ी में सफर करने में डर लगता है। यात्रियों की भारी भीड़ और सुरक्षा के अभाव के चलते महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस बार के रेल बजट में भी महिलाओं को खास नहीं मिला।
हीना, मोहल्ला गोपाल सिंह।
सफर में सुरक्षा को भी नहीं लिया
महिलाएं ट्रेन में अकेले सफर नहीं कर सकती। टिकट लेने से लेकर गाड़ी में चढ़ने और बैठने तक महिलाओं को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बजट में हर बार की तरह इस बार भी महिलाओं को नजरअंदाज किया गया।
ममता, मोहल्ला बाग गुलशेर खां।
काश, हेल्प लाइन की शुरुआत होती
गाड़ियों में लगी महिलाओं की बोगी सिर्फ नाम की है। इसमें पुरुषों के सफर करने से यात्रा असुरक्षित हो जाती है। काश, बजट में सुरक्षा के लिए ऐसी हेल्प लाइन की शुरुआत होती कि फोन करती ही फोर्स पहुंचती।
साधना, मोहल्ला-पूरनमल।
महिला पुलिस की हो व्यवस्था
गाड़ियों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस की तैनाती होनी चाहिए। महिलाओं को सफर में तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं कोई घटना हो जाए तो महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने में भी दिक्कतें आती हैं।
श्रद्धा ठाकुर, मोहल्ला थान सिंह
चुनावी बाजीगरी का नमूना है बजट
जन प्रतिनिधियों ने खोले दिल के पन्ने
पीलीभीत। केन्द्रीय रेल मंत्री पवन बंसल ने मंगलवार को संसद में रेल बजट पेश किया। अपने जिले को रेल बजट में कुछ भी न मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने बजट को चुनावी बाजीगरी का नमूना और बेहद निराशाजनक बताया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि रेल बजट से जिले वासियों की उम्मीदों को ठेंस पहुंची है। प्रस्तुत है अमर उजाला के साथ हुई बातचीत के अंश।
रूहेलखंड मंडल को मिली निराशा
रेल बजट पूरी तरह निराशाजनक है। पूरे रूहेलखंड मंडल को रेल बजट में कुछ भी नहीं दिया गया है। पर्यटन की दृष्टि से खास होने के कारण पीलीभीत जैसे महत्वपूर्ण जिले की उपेक्षा की गई है। रेल बजट से लोगों की उम्मीदों को ठेंस लगी है।
हाजी रियाज अहमद, खादी ग्रामोद्योग राज्यमंत्री।
उम्मीदों पर फिरा पानी
अगला वर्ष चुनावी है। इसके मद्देनजर रेल बजट में बहुत कुछ मिलने की उम्मीद थी। जिले को नजर अंदाज किए जाने से लोगों को निराशा हुई है। बड़ी रेल लाइन के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने इसकी कोई परवाह नहीं की।
हेमराज, विधायक, बरखेड़ा
सुरक्षा की दृष्टि से कुछ खास नहीं
रेल बजट चुनावी बाजीगरी से अधिक कुछ भी नहीं है। कुंभ मेले के दौरान रेल महकमे की लापरवाही उजागर हुई है। सुरक्षा की दृष्टि से रेल बजट में कुछ खास नहीं है। कई दृष्टिकोण से अत्याधिक महत्वपूर्ण अपने जिले को कुछ न मिलना हैरान करता है।
रामसरन वर्मा, विधायक बीसलपुर।
लखनऊ, दिल्ली जाने को रहेगी परेशानी
पीलीभीत से लखनऊ और दिल्ली जाने के लिए रेल सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। इस स्थिति से जिले के लोगों को निजात के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की जरूरत थी। बजट में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है।
पीतमराम, विधायक पूरनपुर।
सियासी दलों के अध्यक्षों की प्रतिक्रिया
महंगी होगी रेल यात्रा
रेल बजट में रेल किराया बढ़ाने का भले ही रेल मंत्री दावा कर रहे हों, लेकिन डीजल के मूल्यों में बढ़ोतरी के अनुरूप रेल किराए में सरचार्ज की व्यवस्था की गई है। इससे रेल यात्रा महंगी होगी। बजट में किसी भी वर्ग के लिए कोई खास चीज नहीं है।
आनंद सिंह यादव, अध्यक्ष सपा।
विकास पर पड़ेगा दुष्प्रभाव
रेल मंत्री ने बजट में जो व्यवस्थाएं की हैं उससे देश की 80 प्रतिशत से अधिक गरीब जनता को कोई लाभ नहीं होगा। अपने जिले को रेल बजट में कुछ नहीं मिलना निराशाजनक है। इससे जिले के विकास पर पड़ रहा दुष्प्रभाव जारी रहेगा।
राम सनेही गौतम, अध्यक्ष-बसपा।
बजट से और बढ़ेगी महंगाई
रेल बजट में जो कुछ मिला है वह रायबरेली को मिला है। पांच प्रतिशत माल भाड़ा बढ़ाए जाने से महंगाई और तेजी पकड़ेगी। केन्द्र सरकार ने पहले ही महंगाई पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बजट में कमर तोड़ने की व्यवस्था की है।
धर्मपाल वर्मा, संयोजक भाजपा।
इससे बेहतर बजट नहीं हो सकता
रेल बजट बहुत बेहतर तरीके से तैयार किया गया है। 2012 तक पूरे देश में बड़ी रेल बिछाने की सरकार की मंशा थी। किराए में वृद्धि न होने के कारण बड़ी रेल लाइनों का काम पूरा नहीं हो पाया। बजट में रेल किराया बढ़ाने से घाटे की पूर्ति होगी और सुविधाएं बढ़ेंगी। इससे बेहतर बजट हो ही नहीं सकता।
उमेश दीक्षित, अध्यक्ष-कांग्रेस।