उधार और नगद मिलेगी डीएपी, एनपीके
आयुक्त और निबंधक ने जारी किया आदेश
उपलब्धता के आधार पर होगा वितरण
प्रति एकड़ एक कट्टा की बाध्यता खत्म
अमर उजाला नेटवर्क
पूरनपुर। किसानों को अब सहकारी समितियों से उपलब्धता आधार पर डीएपी और एनपीके मिलेगी। प्रति एकड़ एक कट्टा और अधिकतम दस कट्टा खाद देने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। उधार के अलावा अब नगद भी डीएपी और एनपीके दी जाएगी।
आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता देवाशीष पाण्डा ने एनपीके और डीपीके की कमी को लेकर प्रति एकड़ पर एक कट्टा और अधिकतम दस कट्टा खाद देे के निर्देश कई साल पूर्व जारी किए थे। आयुक्त एवं निबंधक के निर्देश को लेकर खाद का वितरण किया गया। बाद मेें सहकारी समितियों से केवल समिति सदस्यों को उधार की खाद देने के निर्देश हुए। खाद कम मिलने को लेकर किसान परेशान थे। इधर, अब पुराने रेट की डीएपी खाद की उपलब्धता पर निर्धारित मात्रा और केवल उधार खाद देने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसे लेकर सहायक निबंधकों आदि को पत्र जारी कर इसके निर्देश दिए है। पत्र में कहा गया है कि वितरण की मात्रा और ऋण अथवा नगद का कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। समितियों/ विक्रय केंद्रों पर निरंतर स्टाक उपलब्ध होना सुनिश्चित किया जाए। समितियोें के अलावा डीसीडीएफ, जूट संघ, यूपीएसएस, आल सहकारी संघ, पीसीएफ के कर्मियों द्वारा संचालित बिक्री केंद्रों पर, इफ्को/ कृभको के सेवा केंद्रों के माध्यम से भी खाद वितरित कराने के निर्देश दिए गए है।
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अप्रैल से उधार नहीं मिलेगी खाद बीज
पीलीभीत। सहकारी समितियां अप्रैल माह से किसानों को खाद, बीज, उर्वरक आदि उधार में नहीं देंगी। किसानों को इन सामानों की खरीद नकद भुगतान पर करना होगी। सहायक निबंधक बीएस पांडे ने बताया कि यह व्यवस्था जिले की सभी 76 समितियों पर लागू होगी। किसानों को समितियों से ऋण मुहैया कराने की व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
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बैंक ने कर्ज देने से किया इनकार
फर्द सत्यापन को तहसील कार्यालय भेजी
अमर उजाला नेटवर्क
शेरपुरकलां। किसान सेवा सहकारी समिति प्रबंध कमेटी द्वारा ऋण सीमा स्वीकार किए जाने के बावजूद सहकारी बैंक किसानों को कर्ज देने को तैयार नहीं है। इससे किसानों को रवी की फसल बुवाई में परेशानी हो रही है।
शेरपुरकलां किसान सहकारी समिति की प्रबंध कमेटी की बैठक में बारह नवंबर को 152 किसानों की फसली ऋण सीमा स्वीकार कर उसे जिला सहकारी बैंक की पूरनपुर ब्रांच को भेजा गया था। बैंक मैनेजर ने किसानों को ऋण देने से इसलिए मना कर दिया था, कि उस ऋण सीमा में शामिल होने को करीब एक दर्जन से अधिक किसानों ने शेरपुर में स्थापित जन सेवा केेंद्र से फर्द, खतौनी निकलवाकर समिति कार्यालय में जमा की थी। इन फर्द खतौनियों को बैंक ने मानने से मना कर दिया। इस बाबत बैंक मैनेजर राकेश गुप्ता ने बताया कि जनसेवा केंद्र से अभी तक जो फर्द दी गई है। उसमें अधिकांश फर्जी पाई गई। जिनको सत्यापन को तहसील कार्यालय भेजा गया है। इधर, समिति प्रबंध निदेशक ऋषिराज सिंह ने बताया कि ऋण सीमा बैंक द्वारा चेक कर ली गई है। दो, तीन किसानों को छोड़कर सभी को खाद आदि आसानी से मिल जाएगी।