पीलीभीत। खनन पर लगी रोक ईंट भट्टा कारोबार की जडे़ं हिलाकर रखकर देगी। अक्तूबर से शुरू होने वाले भट्टा सीजन को गति देने के लिए भट्टा स्वामी मिट्टी खनन के लिए किसानों को एडवांस भुगतान कर चुके हैं। लेबर भी एडवांस भुगतान लेकर भट्टों पर पहुंच चुकी है। ईंट फुंकाई के लिए कोयला भी खरीदा जा चुका है। खनन पर रोक न हटी तो यूपी के भट्टा स्वामियों के 4932 करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट पर पानी फिर जाएगा। पीलीभीत के भट्टा स्वामियों को 46 करोड़ का चूना लगेगा। ईंट निर्माण न होने से भाव भी तेजी पकड़ेगा और विकास कार्य पूरी तरह से प्रभावित होंगे।
पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय ने साढ़े पांच एकड़ खनन करने वालों के लिए पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य किया था। बाद में उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद साढ़े पांच एकड़ की शर्त हटा दी गई और किसी भी प्रकार के खनन के लिए पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य हो गया। ईंट भट्टा संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया। पिछले सप्ताह संघ के पदाधिकारियों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर बताया कि यूपी में 40 लाख लेबर भट्टों पर कार्य करती है। इन्हें चार हजार करोड़ रुपये का एडवांस भुगतान हो चुका है। 100 करोड़ रुपये मिट्टी खनन की मद में किसानों को दिए जा चुके हैं। 12 करोड़ रुपये प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को और 20 करोड़ रुपये जिला पंचायतों से जारी होने वाले लायसेंस शुल्क के रूप में दिए जा चुके हैं। पांच करोड़ रुपये से अधिक का कोयला खरीदा जा चुका है। खनन पर रोक न हटने से व्यवसाय का दिवाला निकल जाएगा। संघ के महामंत्री हरवंश दुलवानी बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने भट्टा की समस्याओं को गंभीरता से लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी सूरत में भट्टा व्यवसाय का संचालन सुनिश्चित कराएं।
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खर्च पर एक एक नजर
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पीलीभीत में उ.प्र. में
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कुल भट्टे 150 16 हजार
मौजूद लेबर 37500 40 लाख
लेबर भुगतान 3.75 करोड़ 4000 करोड़ रुपये
खनन पर खर्च 94 लाख 100 करोड़ रुपये
प्रदूषण नियंत्रण शुल्क 11 लाख 12 करोड़ रुपये
जिला पंचायत शुल्क 19 लाख 20 करोड़ रुपये
कोयला पर खर्च 4.68 लाख 5 करोड़ रुपये
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व्यापार कर
व्यापार कर के रूप में ईंट भट्टा स्वामी यूपी में करीब 800 करोड़ रुपयेे का भुगतान करते हैं। जबकि अपने जिले में साढ़े सात करोड़ रुपये का भुगतान होता है।