नसबंदी के बाद बच्चा होने पर सरकार पर डेढ़ लाख का दंड
लोक अदालत का आदेश, डीएम, सीएमओ, पीएचसी बरखेड़ा भरेगी हर्जाना
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। नसबंदी के बाद भी महिला के संतान पैदा होने पर स्थायी लोक अदालत ने राज्य सरकार को डेढ़ लाख रुपये पीड़ित महिला को क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं। यह रकम जिला मजिस्ट्रेट, सीएमओ और प्रभारी चिकित्साधिकारी पीएचसी बरखेड़ा को देनी होगी।
कस्बा बरखेड़ा की कुंदनपुर गौटिया निवासी कमलेश कुमारी पत्नी विजयपाल ने स्थाई लोक अदालत में शिकायत दर्ज कराई। बताया कि 26 सितंबर 2013 को उसने नसबंदी आपरेशन पीएचसी बरखेड़ा पर कराया था। उसे आश्वस्त किया गया था कि नसबंदी के बाद बच्चा नहीं होगा। दो फरवरी 2018 को महिला अस्पताल में दिखाने आई तो अल्ट्रासाउंड कराने पता चला कि वह आठ माह की गर्भवती है। नसबंदी आपरेशन फेल हो गया। उसके छह बच्चे पहले से थे। डाक्टर की लापरवाही से नसबंदी आपरेशन फेल हुआ है। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि महिला ने गर्भ समापन के लिए इच्छा नहीं जताई। जबकि यह सुविधा निशुल्क अस्पताल में है। यह भी कहा कि उसे हर्जाना नहीं दिया जा सकता।
स्थाई लोक अदालत के चेयरमैन डॉ. चरन सिंह और सदस्य गुफरान अली रजवी ने मामले की सुनवाई के बाद पारित आदेश में कहा कि महिला गर्भवती है। यह अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट साबित करती है। गर्भवती होने के कारण उसका नसबंदी आपरेशन असफल रहा है। निर्णय में कई नजीरों का भी उल्लेख किया गया। पारित आदेश में कहा गया कि एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति और 50 हजार रुपये अन्य खर्चों के लिए कुल डेढ़ लाख रुपये राज्य सरकार द्वारा जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य चिकित्साधिकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी संयुक्त एवं पृथक रूप से अदा करें। एक माह के अंदर हर्जाना की रकम न मिलने पर वसूली होने तक आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। स्थाई लोक अदालत के निर्णय पर पीड़ित महिला ने संतोष जताया है।