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लडडू चढाने के साथ ही रथ यात्रा निकाली

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निर्वाण लड्डू चढ़ाकर श्री जी की रथयात्रा निकाली
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खेकड़ा (बागपत)। श्री पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर बड़ागांव में आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित दो द्विसीय श्री 1008 पार्श्वनाथ निर्वाण महोत्सव का निर्वाण लड्डू चढ़ाने एवं श्री जी की रथ यात्रा के साथ ही समापन हो गया।
शनिवार को सुबह के समय मंदिर में श्री जी के समक्ष श्रद्धालुओं ने निर्वाण का 108 किलो का लड्डू चढ़ाया और फिर विधान का आयोजन हुआ। साथ ही अभिनंदन समारोह में आगंतुकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन दिनेश जैन ने किया। इसके बाद सुबह 10 बजे मंदिर से बैंड बाजों, भजन कीर्तन मंडलियों के साथ श्री जी की रथ यात्रा शुरू हुई। जो त्रिलोक तीर्थ मंदिर आदि से होते साधुवृत्ति आश्रम में पांडुक शिला मैदान में पहुंची। वहां से पूजा अर्चना कर वापस प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में समाप्त हुई। इसमें थानाध्यक्ष देवेंद्र विष्ट, प्रवीण जैन, जनेश्वर दयाल जैन, संजीव जैन, त्रिलोक चंद जैन, श्यामलाल जैन, अंकुश जैन, अजेश जैन, नरेश चंद जैन, अमित जैन, दीपक जैन, पंडित धनराज जैन, सुभाष चंद जैन, प्रमोद कुमार जैन, रमेश चंद जैन, अरुण कुमार जैन, नवीन जैन, सुनील जैन, राहुल जैन, राकेश कुमार जैन, सुरेश चंद जैन, आशीष जैन, पंकज जैन, पदम सेन जैन, साहिल जैन, अंकित जैन, सुमेर जैन, विशेष जैन, मनोज जैन, निशंक जैन, विनोद जैन, आकाश जैन, मोहित जैन, वैभव जैन, अनिल जैन, नितिन जैन, अजय जैन, राजीव जैन, प्रदीप जैन, अतुल जैन, महेश जैन, अरिहंत जैन, राजेश कुमार जैन, हरीश जैन, पवन जैन, अशोक जैन, राज कुमार जैन, संजय जैन आदि रहे।
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इससे शुक्रवार की रात्रि में आठ बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ पूजा अर्चना कर मुख्य अतिथि पुलिस क्षेत्राधिकारी संजीव सुमन ने किया। उन्होंने कहा साधु संतों की संगति में रह धर्म मार्ग पर चलने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। कलाकारों ने भगवान पार्श्व नाथ के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की । साथ ही काव्य गोष्ठी में कवियों ने श्री जी को समर्पित कविताएं सुनाई।
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इनसेट
श्री जी की भक्ति करने वाले का जीवन सुखी
खेकड़ा।
आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा निर्वाण महोत्सव पवित्र पर्व में भाग लेने से मनुष्य को सभी कष्टों से निजात मिलती है। जो मनुष्य सच्चे मन से श्री जी की भक्ति करता है। उसका जीवन सुखी हो जाता है। मनुष्य का सबसे प्रथम कर्तव्य जीवन में धर्म मार्ग होता है, जो उसकी महत्ता को नहीं समझता है। वह हमेशा परेशान होकर इधर उधर भटकता रहता है। कभी भी उसके जीवन में शांति नहीं रहती। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन की महत्ता को समझकर धर्म मार्ग पर चल सुखदायी बनाना चाहिए। तभी कल्याण संभव है।
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