पीलीभीत। सरकार के स्वच्छता मिशन कार्यक्रम के चलते अब कूड़ा डालने के लिए स्थाई डलावघर बनाने की तैयारी शुरू की गई है। इसके लिए एडीएम अजयकांत सैनी ने एसडीएम व ईओ की बैठक कर नगरपालिका व नगर पंचायतों में जमीन के प्रस्ताव मांगे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां प्रत्येक गांव में शौचालय बनवाए जा रहे हैं लेकिन शहरों में प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े के निस्तारण अथवा डलाव के कोई इंतजाम नहीं हो पा रहे थे। कूड़े का निस्तारण न होने से देवहा सहित विभिन्न नदियों अथवा नगर कस्बों के बाहर कूड़े को जहां तहां फेंका जा रहा है। अब शासन ने शहर कस्बों से प्रतिदिन निकलने वाले हजारों टन कूड़े के निस्तारण की कवायद शुरू की है। शासन के निर्देश पर एडीएम अजयकांत सैनी ने एसडीएम एवं ईओ की बैठक कर कूड़ा निस्तारण पर चर्चा की और स्थाई डलावघर बनाने के लिए सभी नगरपालिका व नगर पंचायतों में जमीन उपलब्ध कराने को कहा है। एडीएम ने बताया कि पीलीभीत सहित सभी नगरपालिका व नगर पंचायतों में कूड़ा डालने के लिए स्थाई डलाव घर बनाए जाने हैं। इसके लिए आबादी के हिसाब से जमीन का मानक रखा गया है। शहर के लिए लगभग 10 एकड़ जमीन की जरूरत है। उन्होंने बताया कि लेखपालों के माध्यम से जमीन की तलाश कराई जाएगी।
पहले भी कई बार हो चुकी है कवायद
शहर सहित सभी नगरपालिका व नगर पंचायतों से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए पहले भी कई बार प्रयास हो चुके हैं। डीएम ओएन सिंह के समय बरखेड़ा क्षेत्र में जमीन चिह्नित कर सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की कवायद शुरू हुई थी। इसमें शहर के साथ बीसलपुर व पूरनपुर का कूड़ा भी एक ही स्थान पर मंगवाकर इसके निस्तारण की योजना थी लेकिन उनके जाने के बाद योजना ठप हो गई। इसके बाद डीएम मासूम अली सरवर के समय में भी शहर के कूड़ा निस्तारण के लिए नावकूड़ के निकट जमीन चिह्नित की गई जिसे गांव वालों के विरोध पर निरस्त कर दिया गया। अब देखना है कि इस बार शुरू हुई कवायद कुछ रंग लाती है अथवा केवल दिखावटी भाग दौड़ कर फाइल बंद हो जाती है।