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पूरनपुर के कांवड़िया की गोला के कुंड में डूबने से मौत
क्रासर....
लखनऊ ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ा
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हादसे के बाद रविवार रात बिना जलाभिषेक किए वापस लौटा जत्था
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर/कसगंजा। पूरनपुर के कसगंजा गांव निवासी 21 वर्षीय कांवड़िया शिवम भारद्वाज लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ स्थित कुंड में नहाते समय डूबने लगा। गंभीर हालत में अन्य कांवड़ियों ने उसे बाहर निकाला। लखीमपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के बाद लखनऊ ले जाते वक्त रास्ते में शिवम ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद जलाभिषेक किए बिना पूरा जत्था रविवार रात वापस लौट आया। इधर, युवक की मौत से परिवार में चीखपुकार मच गई है।
कोतवाली क्षेत्र के कसगंजा गांव से शनिवार को शिवम समेत 38 कांवड़ियों का जत्था जलाभिषेक करने के लिए लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ के शिवमंदिर को रवाना हुआ था। इसमें शिवम का छोटा भाई करन भी था। शनिवार को क्षेत्र के सिरस जंगल में स्थित बाबा इकोहत्तरनाथ मंदिर के पास से बह रही गोमती नदी से जल लेकर सभी गोला गए थे। शनिवार रात को जत्था खुटार (शाहजहांपुर) की एक राइस मिल परिसर में ठहरा। इसके बाद रविवार सुबह पांच बजे हर-हर महादेव के जयकारों के साथ जत्था गोला के लिए चल पड़ा। रविवार शाम करीब सात बजे सभी कांवड़िया गोला गोकर्णनाथ पहुंच गए। सोमवार सुबह गोला में शिव मंदिर पर जलाभिषेक किया जाना था। कुछ देर आराम करने के बाद सभी मंदिर के पास बने कुंड मेें स्नान करने पहुंच गए। शिवम भी साथी कांवड़ियों संग कुंड में नहाने को चला गया। कुछ आगे बढ़ते ही शिवम कुंड में डूबने लगा। यह देख मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इसके बाद किसी अन्य जत्थे के कांवड़ियों ने उसको बमुश्किल बाहर निकाला लेकिन उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी। आननफानन में साथी कांवड़िया उसे गोला के एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। यहां प्राथमिक इलाज के बाद लखीमपुर खीरी के अस्पताल ले जाया गया। यहां भी हालत नाजुक बताते हुए चिकित्सकों ने लखनऊ रेफर कर दिया। इसके बाद रविवार रात शिवम की लखनऊ ले जाते वक्त मौत हो गई। साथी की मौत के बाद पूरा जत्था बिना जलाभिषेक किए रात को ही पूरनपुर आ गया।
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मजदूरी करता था शिवम
मृतक शिवम तीन भाई बहनों में सबसे बड़ा था। उसके 17 वर्षीय बहन अल्का और 15 वर्षीय भाई करन हैं। पिता गांव में ही एक गैस एजेंसी में नौकरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह भी काम करने लगा था। वह मजदूरी करने के साथ ही अक्सर फड़ लगाकर अनाज की बिक्री किया करता था।
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कपड़े लेकर पहुंचा तो डूब चुके थे भैया
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कांवड़ लेने के लिए शिवम के साथ मैं भी गया था। जब शिवम कुंड में नहाने के लिए जा रहा था। तब उसने मुझसे कपड़े लेकर कुंड के पास आने को कहा। इस पर मैं शिवम के कपड़े लेकर जब तक कुंड के करीब पहुंचा तो भीड़ लगी हुई थी। मौके पर जमा लोग किसी के डूबने की बात कहकर शोर मचा रहे थे। पानी से बेहोशी की हालत में जब शिवम को निकाला गया।- करन भारद्वाज, शिवम का छोटा भाई।
सीढ़ियों पर फिसलकर गिरा था कुंड में
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जत्थे में शामिल अधिकांश कांवड़िया नहा चुके थे। शिवम जत्थे के अन्य कांवड़ियों के साथ कुंड में नहाने के लिए गया था। शोर होने पर पता लगा कि वह डूब गया है। कुछ लोगों ने बताया कि सीढ़ियों पर पैर फिसलने के बाद वह गिर गया था, इसी से डूब गया।- राकेश सक्सेना, साथी कांवड़िया