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खारजा नहर पर भालू की चहलकदमी से दहशत
पुराने वृक्षों की जड़ों में लगी दीमक खाने को जंगल से बाहर आ रहे भालू
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत/माधोटांडा। मानसून की दस्तक के साथ ही वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बराही रेंज के जंगल के बीच से गुजर रही खारजा नहर के रास्ते बाघ के बाद अब भालू की चहलकदमी ने ग्रामीणों की दहशत बढ़ा दी है। राहगीरों ने भालू को जंगल से बाहर देखा तो शोर मचा दिया, जिससे वह वापस जंगल में चला गया। लोग नहर किनारे जाने से बच रहे हैं। वहीं विभाग की ओर से कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए जा सके हैं।
खारजा नहर का ये इलाका टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर लंबे समय से वन्यजीवों की दस्तक है। कई बार बाघ के हमले भी हो चुके हैं। बीते साल दिसंबर 2017 में इसी क्षेत्र में बाघ ने खेत की रखवाली कर रहे डगा गांव निवासी अहमद खां को निवाला बनाया था। इसके बाद कम समय में कई बार बाघ ग्रामीणों की मुसीबत बना, जो अब भी जारी है। इससे बचने के लिए कुछ किसानों ने अपने खर्च पर तार फेंसिंग भी लगवाई है। खारजा नहर के उक्त इलाके में ही छह माह के भीतर दो बाघों के शव क्षतविक्षत हालत मिल चुके हैं। अब मानसून की दस्तक के साथ यहां पर बाघ के साथ-साथ भालू की आवाजाही भी बढ़ी है। एक सप्ताह से बाघ हल्दीडेंगा के आसपास देखा जा रहा है। दो दिन पूर्व डगा गांव निवासी हाजी सईद खां के बाग तक बाघ के पगचिह्न देखे गए। इसके अलावा भालू भी जंगल से बाहर निकल खारजा नहर के सहारे आबादी का रुख कर रहा है। रविवार को रजवाहा के करीब भालू पुराने वृक्षों की जड़ों में लगी दीमक को खाता दिखाई दिया। इधर, से गुजर रहे लोगों ने भालू को देखा तो शोरशराबा हुआ। जिसके बाद वह दोबारा जंगल की तरफ चला गया। यह इलाका जंगल से बाहर है, लिहाजा टाइगर रिजर्व के बजाय यहां सूचना पर सामाजिक वानिकी की टीम ने पहुंच कर पड़ताल भी की। फिलहाल बाघ और भालू की दस्तक के चलते स्थानीय लोग खारजा नहर से दूरी बना रहे हैं।
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खारजा नहर के सहारे भालू की चहलकदमी की जानकारी मिली है। इसको देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। वन रक्षक और वाचरों को लगाकर निगरानी कराई जा रही है। वहीं ग्रामीणों को भी इसको लेकर आवश्यक दिशानिर्देश दिए जा रहे हैं।
साजिद हसन, प्रभारी रेंजर, सामाजिक वानिकी