पीलीभीत। जिले में रोजगार के अवसरों की कमी के चलते युवाओं को महानगरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। रोजगार देने वाले सेवायोजन विभाग के आंकड़ों की माने तो जनवरी से अब तक पंजीकृत 13043 युवाओं में से मात्र 62 बेरोजगार को ही रोजगार मिल सका। अमर उजाला ने जिले में रोजगार की स्थिति पर कुछ युवाओं से रायशुमारी की तो अधिकांश ने जिले में रोजगार के संसाधन न होने की बात कही। खास बात यह है कि उन्होंने इसके लिए जनप्रतिनिधियों को ही दोषी ठहराया।
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रोजगार देने में पिछड़ गया जिला
जिले में रोजगार नाम की चीज ही नहीं है। जिले की युवा आबादी पर गौर किया जाए तो करीब 60 प्रतिशत युवा महानगरों में जॉब करते मिलेंगे। खास बात यह है कि यहां बेरोजगारी तो बढ़ ही रही है, साथ ही औद्योगिक विकास न होने से जिला भी पिछड़ता जा रहा है।
वीरेंद्र कुमार
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डिग्री हासिल कर खेतों में काम कर रहे युवा
शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण अंचलों के युवाओं ने भी मेहनत से पढ़ाई कर डिग्रियां हासिल कर ली, लेकिन आज अधिकतर खेतों में काम करने को मजबूर है। जिले में उद्योग धंधे और अन्य रोजगार देने को संस्थान ही नहीं हैं। एक चीनी मिल है जो सालों से बंद पड़ी है।
दलजीत सिंह
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रोजगारपरक शिक्षा की कमी
जिले में रोजगारपरक शिक्षा की खासी कमी है। छोटे-छोटे प्रोफेशनल कोर्स करने को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। यदि वहां से डिप्लोमा ले भी लिया तो लड़कियों का दूसरे शहरों में जॉब करना मुश्किल है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ताकि युवाओं को रोजगार मिले।
पूजा सक्सेना