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नीचे विद्या अर्जन, ऊपर नाचती मौत

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सर्दी में भी स्कूल के सामने जलभराव
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पीलीभीत। शासन द्वारा जिले में बेसिक शिक्षा के ऊपर हर साल करीब 300 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन सबके बावजूद पढ़ने वाले इन बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिन्हें उनकी दरकार है। अब परिषदीय स्कूलों की ही दशा देखें तो जिले में कई ऐसे जर्जर स्कूल भवन हैं, जहां बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि विभाग सत्यापन कराने के बाद ऐसे स्कूलों की सूची शासन को गत वर्ष ही भेज चुका है, लेकिन अभी इस मामले में शासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जिले में 1230 प्राथमिक और 570 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। गत वर्ष बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले के जर्जर स्कूलों की सूची तलब की थी। जिसमें जिले में करीब 131 स्कूल भवन जर्जर होना पाया गया हैं। इनमें सर्वाधिक जर्जर स्कूल अमरिया ब्लॉक में पाए गए। इसके अलावा सभी सात ब्लॉकों में कुछ ऐसे जर्जर स्कूल भी है जिन्हें जर्जर की श्रेणी में नहीं रखा गया है। खास बात यह है कि कागजों में इन स्कूलों को काफी पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया, लेकिन इन जर्जर भवनों में अब भी पढ़ाई जारी है। हालांकि विभाग अफसरों और शिक्षकों को बच्चों को ऐसे स्कूल भवन से दूर रखने की हिदायत दे चुका है, लेकिन बच्चे खेल-खेल में ही इन जर्जर भवनों की जद में पहुंच ही जातेे हैं। ऐसे में कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बानगी के तौर पर शहर के प्राथमिक विद्यालय परिषदीय आदर्श को देखें तो इस स्कूल में 40 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल का भवन पिछले कई साल से जर्जर है। छत का प्लास्टर छूटकर लगातार नीचे गिर रहा है। दीवारों पर पेड़ उग आए हैं। स्कूलों की दशा देखकर यहां के शिक्षकों ने स्कूल के बच्चों को पड़ोस के ही उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया था, तबसे ये बच्चे इसी भवन में पढ़ रहे हैं।
सत्यापन में 71 स्कूल भवन पाए गए जर्जर
गत वर्ष शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को जर्जर स्कूल भवनों का चिह्नित करते हुुए इन सभी का सत्यापन पीडब्ल्यूडी विभाग से सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। विभाग ने जिले में 131 स्कूलों को जर्जर पाते हुए इसकी सूची पीडब्ल्यूडी को सौंपी थी। तत्कालीन डीएम शीतल वर्मा के निर्देश पर गठित तीन टीमों द्वारा सत्यापन किया गया। पीडब्ल्यूडी द्वारा किए गए सत्यापन 71 स्कूल भवनों को जर्जर पाया गया। इसकी सूची अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
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शासन के निर्देशानुसार जर्जर स्कूल भवनों का सत्यापन गत वर्ष ही करा लिया गया था। जिसमें 71 स्कूल भवन जर्जर पाए गए थे। सूची शासन को भेजी चुकी है। इन भवनों का मूल्यांकन कर इन्हें नियमानुसार नीलाम किया जाएगा।
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- पंकज शाक्य, जिला समन्वयक निर्माण
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