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ऐेसे तो थानों का मालखाना बन ही जाएगा कबाडख़ाना

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21 पीबीटीपी 1,2
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ऐेसे तो थानों का मालखाना बन जाएगा कबाड़खाना
माल मोहर्रिर के चार्ज न संभालने पर बिगड़ी व्यवस्था, अधिकारी बेबस
कई बार फजीहत के बाद भी हालात जस के तस, नहीं लिया सबक
वैभव शुक्ला
पीलीभीत। जिले के सभी थानों में स्थित मालखानों में लंबित माल की भरमार है। माल को लेकर अभिलेख दुरुस्त नहीं हैं, साथ ही उनके सुरक्षित होने पर भी सवालिया निशान बना है। ऐसे में अभियोजन के समय साक्ष्य मांगे जाने पर कई बार पुलिस को मुंह की खानी पड़ती है। थानों में माल मोहर्रिर की तैनाती प्रक्रिया में बरती जा रही लापरवाही इसके लिए कम उत्तरदायी नहीं है। माल मोहर्रिर के बिना चार्ज दिए स्थानांतरण पर चले जाने से अधिकारी भी शिकंजा नहीं कस पा रहे हैं।
पुलिस रिकार्ड में दर्ज विभिन्न मुकदमों से संबंधित माल बरामदगी के बाद जीडी में दाखिल होने के साथ ही सील कर मालखाने में रखा जाता है। मुकदमा ट्रायल पर आने पर अदालत में संबंधित माल को पेश किया जाता है ताकि साक्ष्य संकलन के साथ आरोपी पर सही तरह से आरोप तय किया जा सके। अभियोजन की यह प्रक्रिया पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के चलते सुस्त पड़ी हुई है। हालात ये हैं कि साक्ष्य के दौरान न्यायालय जब संबंधित मुकदमे से जुड़ा माल तलब करता है तो उसको तलाशना ही पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। इसके लिए थानों में माल मोहिर्रर का न होना और अभिलेखों का अपडेट न होना अहम वजह है। कई बार तो गंभीर स्थित तब हो जाती है जब हत्या जैसे संगीन अपराध में विसरा, आला कत्ल समेत अहम साक्ष्य ही नहीं मिल पाते। विभागीय अधिकारियों के अलावा कई बार न्यायालय भी इस पर सख्त टिप्पणी कर चुका है, लेकिन खाकी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। शायद यही वजह है कि वर्तमान समय में भी जिले के अधिकांश थानों में हकीकत मालखाने को लेकर अलग नहीं है। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
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वाहनों का न रखरखाव, न सटीक डाटा
कुछ ऐसा ही हाल सीज वाहनों को लेकर भी है। अधिकारियों की ढिलाई के चलते ये वाहन कंडम हो चुके हैं। इन्होंने थानों और चौकियों की सूरत भी बिगाड़ कर रख दी है। कई थानों पर तो इनको रखने की भी जगह नहीं है। वाहनों को सड़क पर ही अतिक्रमण कर खड़ा कर दिया है। अधिकारी न तो मालखाने के जब्त माल का निस्तारण कर पा रहे हैं, न ही इन वाहनों की नीलामी में उनका मन लगता है। इतना जरूर है कि निरीक्षण के दौरान इसको लेकर नाराजगी जताने के साथ ही निर्देश देकर कर्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं।
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कोर्ट ने विसरा तलब किया तो ढूंढती रह गई पुलिस
मालखाने को लेकर महकमे की ओर से बरती जा रही लापरवाही का एक उदाहरण करीब तीन माह पूर्व सामने आया था। शहर के बहुचर्चित पेट्रोल पंप प्रबंधक निर्मल मिश्रा की हत्या के मामले में अदालत ने जेल में मरने वाले एक हत्यारोपी का विसरा तलब किया। इसके बाद पुलिस कोतवाली के मालखाने को खंगालती रह गई, लेकिन विसरा नहीं मिल सका। इसकी रिपोर्ट बनाकर न्यायालय को भेज दी गई। वहीं संबंधित हेड मोहर्रिर सूरजपाल को विभागीय दंड दिया गया। इस दौरान हुई फजीहत से भी खाकी ने सबक नहीं लिया।
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माल मोहर्रिर का चार्ज दो तो हो जाते हैं बीमार
पहले से गड़बड़ चल रही व्यवस्था की गाज खुद पर न गिर जाए। इसलिए माल मोहर्रिर चार्ज लेने ही नहीं पहुंचते। अगर अफसर दबाव बना भी लें तो संबंधित पुलिसकर्मी या तो बीमार हो जाता है या फिर अन्य तमाम बहाने तलाशने लगता है। इसके बाद अफसरों की बेबसी दिखाई देती है। कुछ माह पूर्व सुनगढ़ी, जहानाबाद, न्यूरिया थाने से इसकी बानगी देखने को भी मिली थी। सर्किल स्तर के अधिकारियों को माल मोहर्रिर को चार्ज ग्रहण कराने में कई दिनों तक परेशान होना पड़ा था।
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थानों में माल मोहर्रिर की तैनाती कराई जा रही है। मालखानों का चार्ज न लेने पर वेतन रोकने तक की कार्रवाई की जाती है। संबंधित माल का अभिलेखों से मिलान कर निस्तारण कराया जा रहा है। इसको गंभीरता से लेने के साथ ही सख्ती की जाएगी।- बालेंदु भूषण सिंह, एसपी
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