माधोटांडा/पीलीभीत। हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बाद भी शारदा डैम की तलहटी में राज्य सरकार की 1171 एकड़ कृषि भूमि पर खड़े पड़ों का धड़ल्ले से सफाया हो रहा है। लकड़ी माफिया जिम्मेदारों से सांठगांठ कर अवैध रूप से काबिज लोगों से मिलकर हरियाली का सफाया करने में लगे हैं। खास बात यह है कि एसएसबी की पूछताछ में माफिया इन पेड़ों को संरक्षित प्रजाति का न होने का हवाला देकर अपना बचाव कर रहे हैं। शारदा डैम की तलहटी में स्थित सिंचाई विभाग की 1171 एकड़ भूमि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को पट्टे पर आवंटित करने के लिए राजस्व विभाग को ट्रांसफर की गई थी। इस भूमि पर पूर्व से ही अवैध रूप से लोग काबिज हैं। इनमें कुछ पूर्वांचल और अधिकतर बंगाली समुदाय के अपंजीकृत लोग हैं। पूर्व के वर्षों में जब प्रशासन की ओर से पट्टे की कार्रवाई शुरू की तो अपंजीकृत बंगालियों के पास भारत की नागरिकता का प्रमाण नहीं मिला, लिहाजा तत्कालीन डीएम कौशल राज शर्मा ने पट्टे करने से इंकार कर दिया और उक्त भूमि के अनुसूचित जाति के लोगों को पट्टे करने का आदेश कर दिया। यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि संबंधित ग्राम पंचायत में दलित नहीं है तो अन्य न्याय पंचायत स्तर से भूमिहीन दलितों के पट्टे किए जाएंगे। प्रशासन के इस रवैये से घबराए लोगों ने प्रधानों से संपर्क कर मामले में उच्च न्यायालय में स्थगन आदेश ले लिया था। वर्तमान में भी यह मुकदमा हाईकोर्ट में चल रहा
है।
भूमि से हटने के डर से पेड़ों का कराया सफाया
इधर, अवैध कब्जेदारों को जब यह भनक लगी कि किसी भी दिन उक्त भूमि उनके हाथों से निकल सकती है। तो उन्होंने लकड़ी माफिया से सांठगांठ कर धड़ल्ले से हरे भरे वृक्षों का कटान शुरू करा दिया। रोजाना करीब छह लकड़ी लदे ट्रक अवैध रूप से निकाले जाते हैं। सरकार के पॉपुलर और यूकेलिप्टस पर छूट देने का हवाला देकर इस धंधे को अंजाम दिया जा रहा है, जबकि भूमिधरी काश्तकार के लिए छूट दी गई है। सवाल यह है कि हाईकोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बाद भूमि पर खड़े पेड़ों का आसानी से सफाया किया जा रहा है।
पापुलर और यूकेलिप्टस के पेड़ों को काश्तकार से खरीदने के बाद ही ठेकेदार काट रहे हैं। यदि उक्त भूमि से संबंधित राजस्व और सिंचाई विभाग सामाजिक वानिकी से कोई पत्राचार करता है। तो नियमित रूप से मामले में कार्रवाई की जाएगी। - साजिद हसन, डिप्टी रेंजर, सामाजिक वानिकी