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टुल्ला: इंडो-नेपाल बार्डर रोड
मंजूरी मिली, सर्वे हुआ, फिर भी नहीं बनी सड़क
निर्माण प्रक्रिया अभिलेखों में दफन, केंद्रीय मंत्रालय से पांच साल पहले मिली थी मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। भारत नेपाल सीमा पर सुरक्षा की लिहाज से मंजूर की गई बार्डर सड़क का निर्माण विभागीय तकनीकी खामियों के चलते आज भी ठंडे बस्ते में है। खास बात है कि बरसात से पूर्व सड़क का सर्वे कार्य भी पूरा हो गया था पर इसे बनाने की कवायद शुरू नहीं हो रही।
इंडो नेपाल बार्डर पर सुरक्षा के लिहाज से पांच वर्ष पूर्व केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बार्डर सड़क को मंजूरी मिली थी। भारत सरकार ने सड़क निर्माण के लिए एक बड़ी धनराशि मंजूर की थी। इसके बाद सड़क निर्माण के लिए कार्रवाई तेज हुई। शुरुआती सर्वे के दौरान सीमा पिलर नंबर 17 से लेकर 29 तक जंगल पड़ने के चलते टाइगर रिजर्व के अफसरों ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। इसके बाद दोनों विभाग के अधिकारियों ने दौरा कर सड़क की चौड़ाई कम करने का फैसला किया था। वही नोमेंस लैंड से लगभग दो सौ मीटर भारतीय क्षेत्र की ओर सड़क निर्माण की बात कही गई थी।
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सड़क निर्माण में रोड़ा बन रहे 11 सौ पेड़
बार्डर सड़क के लिए टाइगर रिजर्व व सड़क बनाने के जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी अभियंताओं ने सर्वे किया तो सीमा पिलर नंबर 17 से लेकर 28 तक टाइगर रिजर्व की भूमि पर 11 सौ से अधिक वृक्ष होने की बात सामने आई। इसके बाद दोनों विभागों के अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी थी।
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वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर भेजे ओवरब्रिज के प्रस्ताव
टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे इलाके में नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी पड़ती है। जहां दोनों देशों के वन्यजीव खुले में विचरण करते रहते हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से टाइगर रिजर्व प्रशासन ने क्षेत्र के तीन स्थानों पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव भी भेजा था।
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एनटीसीए से नहीं मिल सकी मंजूरी
इंडो नेपाल बार्डर सड़क का निर्माण कार्य कारणों से शुरू नहीं हो सका है। यही नहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के चलते नेपाल की बमनी व शारदा समेत कई बड़ी नदी और नाले रास्ते में पड़ते हैं। इस पर पुल बनाए जाने थे लेकिन बार्डर सड़क के अभियंताओं के मुताबिक एनटीसीए से मंजूरी नहीं मिलने से निर्माण ठंडे बस्ते में पड़ा है।
वर्जन
इंडो नेपाल बार्डर सड़क के लिए वन विभाग की ओर से प्रपोजल बनाकर पीडब्ल्यूडी को भेज दिया गया है। उनकी संस्तुति के बाद ही आगे कार्रवाई की जाएगी। - प्रवीण खरे, एसडीओ, टाइगर रिजर्व