जिले में हेपेटाइटिस सी की दस्तक, बढ़ गए दोगुना केस
बीमारी की रोकथाम और गंभीर इलाज की जिला अस्पताल में नहीं सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। कैंसर जैसी बीमारी का नाम सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है, लेकिन ठीक उसी तरह से हेपेटाइटिस सी की बीमारी भी लोगों में हो रही है। खून के संक्रमण से होने वाली यह बीमारी काफी घातक है। समय रहते इलाज न होने से इसमें मरीज की जान तक जा सकती है। बीते साल से यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। पिछले साल की तुलना में मरीजों की संख्या दो गुना बढ़ी है।
हेपेटाइटिस बी का मतलब पीलिया से होता है। इसका दूसरा रूप हेपेटाइटिस सी है। गर्मी और बरसात के दिनों में पीलिया पांव पसारता है। पीलिया होने पर बेहद कमजोरी, जी मिचलाना, सिरदर्द, भूख न लगना आदि परेशानियां रहने लगती हैं। हेपेटाइटिस बी का इलाज संभव है। इसका टीका भी बाजार में उपलब्ध है, लेकिन हेपेटाइटिस सी एक जानलेवा बीमारी है। इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह संक्रमित सुई के प्रयोग, प्रदूषित जल के सेवन, संक्रमित रक्त आदि से होता है। इसका लीवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इस रोग से ग्रसित लोगों के अस्पताल पहुंचने का ग्राफ बढ़ रहा है। निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में इसके रोगी पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल की तुलना में हेपेटाइटिस मरीजों की संख्या दो गुना बढ़ी है। वहीं खासबात यह है कि तेजी से पैर पसार रहे हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए जिले में कोई खास व्यवस्था नहीं है। जांच में पुष्टि होने के बाद फिजीशियन मरीज को देखते है और जरा भी हालत गंभीर होने पर उसे रेफर कर दिया जाता है।
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यह है हेपेटाइटिस सी का सरकारी आंकड़ा
वर्ष 2017 में जनवरी में कोई नहीं था तो फरवरी में दो लोगों में पुष्टि हुई थी। मार्च, अप्रैल, मई, जून में भी किसी में पुष्टि नहीं हुई तो जुलाई और अगस्त में एक-एक में पुष्टि हुई थी। सितंबर में चार लोगों में पुष्टि होने के बाद अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में कोई केस सामने नहीं आया। 2017 में इस तरह से सात लोगों में हेपटाइटिस सी का वायरस होने की पुष्टि हुई थी। यह आंकड़ा वर्ष 2018 में बढ़ गया और मात्र छह माह में अब तक 17 हो गया है। इसमें वर्ष 2018 की शुरूआत में जनवरी माह में ही तीन, फरवरी में एक की पुष्टि हुई थी। मार्च में किसी में पुष्टि नहीं हो सकी तो अप्रैल में चार, मई, जून में तीन-तीन, जुलाई, अगस्त में चार-चार व सितंबर में तीन लोगों में पुष्टि हुई है। इससे लग रहा है कि इस साल हेपेटाइटिस सी का वायरस तेजी के साथ पैर पसार रहा है, जबकि अभी नौ माह ही बीते हैं। 000000
सबसे खतरनाक है हेपेटाइटिस सी
हेपाटाइटिस वायरस मुख्यता पांच प्रकार के होते हैं। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, एवं ई। फिलहाल सबसे ज्यादा लोग हेपेटाइटिस बी और सी के शिकार हो रहे हैं। हेपेटाइटिस ए एक विषाणु जनित रोग है। इसमें लीवर में सूजन आती है। हालांकि हेपेटाइटिस ए सबसे कम खतरनाक है। हेपेटाइटिस ए व बी से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। हेपेटाइटिस सी का अभी कोई टीका उपलब्ध नहीं है। इससे बचने के लिए दूषित पानी एवं दूषित खाने से बचना चाहिए। हेपेटाइटिस डी केवल उन्हीं व्यक्तियों को होता है जो हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होते हैं। हेपेटाइटिस ई अधिकतर दूषित खाने एवं दूषित पानी से फैलता है। यह बीमारी दो से छह हफ्ते में स्वयं ठीक हो जाती है, लेकिन इस रोग से कभी-कभी अचानक लीवर फेल हो जाता है।
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ये हैं बचाव के तरीके
हेपेटाइटिस से बचने के लिए दूषित खानपान से परहेज रखना चाहिए। यदि आप शेविंग कराने जा रहे हैं तो यह सुनिश्चित कर लें कि ब्लेड पूर्व में इस्तेमाल नहीं किया हो। किसी इंजेक्शन को लगवाने के लिए डिस्पोजेबल सिरिंज खरीदें। शुरूआती दौर में लक्षण दिखाई देने पर गर्म पानी को ठंडा कर पीना चाहिए। बगैर समुचित जांच के किसी का रक्त न चढ़वाएं।
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वर्जन..
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी वायरस की पुष्टि होने वाले गंभीर मरीजों की बेहतर इलाज के लिहाज से रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में बीमारी से संबंधित जांच की सुविधा है।
डा. रतपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला अस्पताल