ऐसे में आग लगी तो काबू में नहीं होगा बुझाना
आपातकालीन दमकल सेवा खुद वेेंटीलेटर पर
20 लाख आबादी की सुरक्षा जिम्मा, न स्टॉफ न संसाधन
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वैभव शुक्ला
पीलीभीत। गर्मी बढ़ने के साथ आए दिन हो रही आग की घटनाओं के बावजूद प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा। अफसर भले आग से निपटने के तमाम दावे करते रहे, लेकिन स्टाफ और संसाधनों की चल रही कमी कभी भी बड़ी मुसीबत बन सकती है।
20 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में शहर समेत 1252 गांवों में होने वाली आग की घटनाओं से निपटने को नाममात्र के संसाधन हैं। 4500 लीटर क्षमता की सिर्फ दो बड़ी गाड़ी हैं जोकि एक बीसलपुर व दूसरी जिला मुख्यालय पर रहती है। इसके अलावा पूरनपुर, कलीनगर व अमरिया तहसील स्थित दमकल केंद्रों पर सिर्फ 400 लीटर क्षमता के एक-एक छोटे वाहन हैं। जिनके सहारे क्षेत्र में होने वाली आगजनी को काबू करना मुमकिन नहीं है। गन्ने के बाद गेहूं की फसल को लेकर खेतों में आगजनी की घटनाएं बढ़ना तय है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर ऐसे में भीषण आग लगी तो समय रहते उसको बुझाना अग्निशमन विभाग के वश की बात नहीं। सालों से जस के तस बने हालात में सुधार नहीं हो सका। नतीजतन अनदेखी के चलते आपातकालीन सेवा दमकल खुद वेंटीलेटर पर है।
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प्रेशर है नहीं, अधिकांश हाइडेंट बिजली पर निर्भर
विभाग की हाइडेंट व्यवस्था का भी पुरसाहाल नहीं है। वैसे तो कुल 14 हाइडेंट थे, लेकिन छह हाइडेंट सड़क ऊंची होने के बाद दब गए। दमकल कार्यालय के हाइडेंट में प्रेशर न होने के कारण गाड़ी में पानी भरना आसान नहीं होता। आवास विकास, बरेली गेट, मंडी समिति, रामस्वरुप पार्क, वाटर वर्क्स, नकटादाना, स्टेडियम रोड पर बने हाइडेंट में प्रेशर के साथ ही सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर बिजली नहीं हुई तो ये काम नहीं करेंगे। सिर्फ मां यशवंतरी देवी मंदिर के पास का हाइडेंट साख बचाए हुए है।
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कर्मचारियों की समस्या भी बरकरार
स्टाफ कमी को भी सालों बाद दूर नहीं किया जा सका है। जिला मुख्यालय पर सीएफओ की तैनाती तो कर दी गई। लेकिन एफएसओ (फायर स्टेशन ऑफिसर) व दो एफएसएसओ के पद खाली हैं। 21 सिपाहियों के स्थान पर पंद्रह सिपाही मौजूद हैं।
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कई बार हो चुकी है मुसीबत
2017 में शहरी क्षेत्र में आग की 198 घटनाएं हुई थी। जबकि ग्रामीण इलाकों में इससे भी अधिक घटनाएं होती है। पांच साल पहले कलक्ट्रेट परिसर के पीछे बनी कालोनी में आग की घटना हो, या फिर मंडी समिति का अग्निकांड, दोनों में ही संसाधनों का अभाव मुसीबत का सबब बना था। बरेली से गाड़ी आने पर आग काबू की जा सकी थी।
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कर्मचारियों के बचाव को भी नहीं गंभीर
दमकल कर्मियों को महकमा सुविधा नहीं दे सका है। आगजनी से बचाव के नाम पर लापरवाही जारी है। जिले के दमकल कर्मियों के पास एक भी एजवेस्टर्स सूट नहीं है।
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फेक कॉल से कर्मचारी परेशान, अफसर बेसुध
सर्विलांस का तोहफा मिलने पर खाकी मजबूत हो गई। इसके बावजूद दमकल के कंट्रोल रूम नंबर पर कॉल कर कर्मियों से अभद्रता करने वालों पर सख्ती नहीं हो सकी है। फोन ड्यूटी पर 24 घंटे तैनात रहने वाले कर्मचारी परेशान हैं, लेकिन अफसर बेसुध बने हैं।
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तीन साल से लगातार गाड़ियों की डिमांड भेजी जा रही है। हर माह इसका रिमाइंडर भेजा जाता है, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं मिला है। स्टाफ कमी को लेकर भी पत्राचार जारी है। पांचों स्टेशन पर गाड़ी लगाई गई हैं, आगजनी की सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
ब्रह्मानंद दुबे, सीएफओ
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