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गोष्ठी मे खरपतवारो को नष्ट करने की दी जानकारी।

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खेकड़ा (बागपत)। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा किसान खरपतवार पर अंकुश लगाने के लिए कीटनाशकों का नियमित रूप से छिड़काव करें।
मंगलवार को ग्राम मवी कला स्थित किसान इंटर कॉलेज में कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के तत्वावधान में कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में केंद्र के कृषि वैैैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह ने कहा खरपतवार पर अंकुश लगाया जरूरी है, क्योंकि खरपतवार मौजूदा समय में फसल की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। सबसे अधिक गाजर घास अर्थात चटक चांदनी खरपतवार घास है। जो बडे़ ही आक्रामक ढंग से फैलती है। यह एक वर्षीय शाकीय पौधा है। जो हर तरह के मौसम में तेजी से उठकर फैलती है और फसलों के साथ साथ मनुष्य एवं पशुओं के लिए भी गंभीर समस्या बन जाती है। उन्होंने कहा गाजर घास का उपयोग अनेक प्रकार के कीटनाशक, जीवाणु नाशक और खरपतवार नाशक दवा के निर्माण में किया जा सकता है। इसकी लुग्दी से कागज तैयार किया जा सकता है। बायोगैस उत्पादन के साथ भी इसको गोबर में मिलाया जा सकता है। इस खरपतवार की बीस प्रजातियां पूरे विश्व में पायी जाती है। इसका पौधा एक हजार से पांच हजार तक अत्यधिक सूक्ष्म बीज पैदा करता है। जो जमीन पर गिरते ही प्रकाश एवं अंधकार में नमी पाकर अंकुरित हो जाते हैं। इसमें तेजबीर सिंह, डॉ. संजय कुमार, डॉ. सुरेंद्र कुमार, कर्ण सिंह, कपिल कुमार, रामअवतार, विकास, रमेश, आंसू, नीरज आदि रहे।
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दूसरी तरफ छपरौली खंड विकास कार्यालय पर दो दिवसीय दलहन-तिलहन फसलों पर गोष्ठी की। इसमें सहायक विकास अधिकारी कृषि महेश कुमार खोखर बताया सरसों और तोरिया से किसान ज्यादा लाभ ले सकते हैं। किसानों को धान और गन्ने की फसल में होने वाले रोग को दूर करने के उपाय बताए। प्रमेंद्र कुमार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, महेंद्र सिंह डबास ने कृषि पंजीकरण की जानकारी दी। पूर्व एडीओ कृषि ओम सिंह ने धान की फसल और कृतपाल सिंह ने हरी खाद व मृदा नमूना लेने की विधि बताई। राहुल पंवार, अमित, सुरेश पाल, संजीव, लोकेंद्र, यशपाल, संजीव, सुक्रमपाल पंवार मौजूद रहे।
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