पीलीभीत। दो दिन पहले नगर पालिका प्रशासन ने बायोमेडिकल सड़क पर फेंकने के मामले में एक निजी अस्पताल पर जुर्माना डाला था। नगर पालिका
अस्पताल से निकले बायोमेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए और उसे खुले में न फेंका जाए, इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन हालातों को देखते हुए लगता है कि स्वास्थ्य विभाग को इससे कोई लेना देना नहीं है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा एक अस्पताल संचालक पर की गई कार्रवाई के बावजूद अब भी खुले में मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है।
अस्पतालों से निकला बायोमेडिकल वेस्ट इंसानों के लिए खासा हानिकारक है। इसके संपर्क में आने पर संक्रमण हो सकता है और व्यक्ति कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकता है। जिले भर में करीब 30 से अधिक बड़े निजी अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। आईएमए के पदाधिकारियों का दावा है कि उनके निजी अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है। उनका कहना है कि खुले में झोलाछाप ही बायोमेडिकल वेस्ट फेंक रहे होंगे, लेकिन बायोमेडिकल वेस्ट को देखकर विश्वास करना मुश्किल है कि ये वेस्ट किसी झोलाछाप ने डलवाया है। इस मामले को अमर उजाला ने हाल ही में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग तो चुप्पी साधे रहा, लेकिन पालिका प्रशासन ने सुरागरसी कर खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालने वाले एक अस्पताल पर जुर्माना डाल दिया। माना जा रहा था कि अब सड़कों के किनारे बायोमेडिकल वेस्ट नहीं मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कार्रवाई के बावजूद अब भी खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डाला जा रहा है। हालांकि इन बायोमेडिकल वेस्ट डालने वालों ने एक नया फार्मूला ईजाद किया है। खुले में डाले गए बायोमेडिकल वेस्ट मेें आग लगानी शुरू कर दी है ताकि उसकी पहचान न हो सके। अब जिदंगी से खिलवाड़ करने वालों से स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका प्रशासन कैसे निपटेगा, इसका फार्मूला तो इन्हीं विभागों के पास होगा।
सड़क किनारे बायोमेडिकल वेस्ट फेंकने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। ये बायोमेडिकल वेस्ट सुबह या देर शाम डाला जा रहा है। साक्ष्य मिलते ही संबंधित अस्पताल पर कार्रवाई की जाएगी। - निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद