पीलीभीत। अन्नदाता किसानों को उनकी मेहनत का फल देने के लिए सरकार ने तमाम व्यवस्थाएं कर गेहूं का समर्थन मूल्य भी निर्धारित कर दिया है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते शासन की मंशा पर पानी फिरता दिखाई देे रहा है। किसानों के चेहरों पर भी इसका मलाल साफ दिखाई दे रहा है। किसानों की मानें तो सरकारी खरीद केंद्रों के मानके के अनुसार खतौनी आदि जमा करने के बावजूद रजिस्ट्रेशन में दिक्कत बताकर पेमेंट रोक लिया जाता है। केंद्र प्रभारी ही किसानों को इस तरह के झंझटों में उलझा रहे हैं कि वे बिचौलियों को कम कीमत पर गेहूं बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अधिकारी किसानों के साथ हो रहे इस खेल को अच्छी तरह समझ भी रहे हैं, लेकिन सिर्फ आदेश और निर्देश देकर ही काम चला रहे हैं।
जिले में सरकारी क्रय केंद्र स्थापित कर यूं तो एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू कर दी गई, लेकिन करीब 15 दिन तक क्रय केंद्रों पर गेहूं में नमी अधिक बताकर किसानों को टहलाया जाता रहा। सरकारी खरीद में तेजी तो 15 अप्रैल के बाद ही आ सकी, लेकिन जब क्रय केंद्रों पर गेहूं की आमद बढ़ी तो बिचौलिए हावी हो गए। शासन ने गेहूं का सरकारी मूल्य 1840 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। क्रय केंद्रों के मानक पूरे करने के बावजूद किसानों के सामने इस तरह की कठिनाइयां पैदा की जा रही हैं कि वे बिचौलियों के हाथों 1700 से 1750 में गेहूं बेचने को विवश हैं।